• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

जमानत निरस्त करना आसान नहीं: जबलपुर हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका, दिए कड़े निर्देश

जबलपुर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक मामले में पूर्व में स्वीकृत जमानत को निरस्त करने के लिए ठोस और विशेष परिस्थितियों का होना अनिवार्य ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 05:26:59 PM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 05:26:59 PM (IST)
जमानत निरस्त करना आसान नहीं: जबलपुर हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका, दिए कड़े निर्देश
आपराधिक मामलों में जमानत रद्द करने पर हाई कोर्ट का सख्त फैसला (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने जमानत निरस्तीकरण से जुड़ी याचिका निरस्त की
  2. जमानत देने और रद्द करने के कानूनी पैमाने अलग-अलग हैं
  3. आरोपी राकेश रघुवंशी को जिला अदालत से मिली थी जमानत

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आपराधिक प्रकरण में एक आरोपी को मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश आरके चौबे की एकलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी आरोपी को जमानत देने और पहले से मंजूर जमानत को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया और कसौटियां पूरी तरह से भिन्न हैं। अदालत के अनुसार, पूर्व में दी गई राहत को वापस लेने के लिए अत्यंत ठोस और असाधारण परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।

क्या था पूरा मामला?

यह याचिका नर्मदापुरम के निवासी सचिन ठाकुर द्वारा दायर की गई थी। याचिका में उल्लेख किया गया था कि निचले जिला न्यायालय ने प्रकरण के अनावेदक राकेश रघुवंशी को जमानत का लाभ दिया था। जिला अदालत ने यह राहत इस आधार पर दी थी क्योंकि मामले के एक अन्य सह-आरोपी को उच्च न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी थी। जमानत की मंजूरी देते वक्त अदालत ने यह शर्त तय की थी कि अभियुक्त भविष्य में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा।


याचिकाकर्ता के तर्क और निचली अदालत का रुख

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जेल से बाहर आने के बाद अनावेदक ने पुनः अपराध घटित कर अदालत द्वारा लगाई गई शर्त का उल्लंघन किया है। अतः उसकी जमानत तुरंत निरस्त की जानी चाहिए। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि याचिकाकर्ता ने इससे पहले जिला न्यायालय में भी यही गुहार लगाई थी। उस समय जिला अदालत ने याचिका को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि जमानत रद्द करने के लिए ठोस और विशेष कारणों का होना आवश्यक है।

उच्च न्यायालय का फैसला

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह से उचित और कानूनसम्मत ठहराया। एकलपीठ ने कहा कि मात्र आरोपों के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती। मामले में निरस्तीकरण के लिए कोई पर्याप्त और विधिक आधार न पाते हुए उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।