जबलपुर में सुनवाई, आवेदन की अंतिम तिथि तक होनी चाहिए निर्धारित योग्यता, हाई कोर्ट का अहम आदेश
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ताओ को कोई भी फायदा देना समानता के सिद्धांत का उल्लंघ ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 05 May 2026 07:48:43 AM (IST)Updated Date: Tue, 05 May 2026 07:51:47 AM (IST)
असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट के लिए एलिजिबिलिटी क्वालिफिकेशन संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएट व पीडीसी है।HighLights
- आदेष के साथ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया
- एग्जाम में शामिल होने की इजाज़त देने की राहत चाही थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के अपने अहम आदेश में कहा है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता होनी अनिर्वाय है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ताओ को कोई भी फायदा देना समानता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा। जो हमारे संविधान के तहत मौलिक अधिकारी की रीढ़ है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।
एक सैंकडा से अधिक याचिकाओं की तरफ से दायर याचिका
कीर्ति पटैल, शिव चरण सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से एक सैंकडा से अधिक याचिकाओं की तरफ से दायर याचिका में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए एग्जाम में शामिल होने की इजाज़त देने की राहत चाही गई थी।
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विज्ञापन के अनुसार एप्लीकेशन जमा करने की अंतिम आखिरी 26 मार्च 2025 थी
याचिका में कहा गया था कि असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट के लिए एलिजिबिलिटी क्वालिफिकेशन संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएट व पीडीसी है। विज्ञापन के अनुसार एप्लीकेशन जमा करने की अंतिम आखिरी 26 मार्च 2025 तक शैक्षिणिक योग्यता आवश्यक था, जिसे बाद में 10 अप्रैल 2025 तक बढ़ा दिया गया था।
दूसरे पदों की नियुक्ति के लिए ऐसी अनुमति प्रदान की है
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे अपने कोर्स के आखिरी सेमेस्टर के स्टूडेंट थे और सिलेक्शन प्रोसेस पूरा होने तक क्वालिफाई पूर्ण हो जायेगी। दूसरे पदों की नियुक्ति के लिए ऐसी अनुमति प्रदान की गई है।
कुछ उम्मीदवार ऐसे भी होगे हो याचिकाकर्ताओं की सीनियर होंगे
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक आवेदक के पास निर्धारित योग्यता होनी आवश्यक है। कुछ उम्मीदवार ऐसे भी होगे हो याचिकाकर्ताओं की सीनियर होंगे। पदों की संख्या निर्धारित है और याचिकाकर्ताओं को अनुमति प्रदान की जाती है तो यह उनके साथ अन्याय होगा। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सभी याचिकाओं को निरस्त कर दिया।