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FIR नहीं लिखी तो हाई कोर्ट सख्त, भोपाल पुलिस कमिश्नर को तीन दिन में कार्रवाई के निर्देश

याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी रूपा पांडे, उपनिरीक्षक शैलेंद्र राजावत और महिला प्रधान आरक्षक डॉली चौरसिया के खिलाफ विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 10:37:28 AM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 10:37:28 AM (IST)
FIR नहीं लिखी तो हाई कोर्ट सख्त, भोपाल पुलिस कमिश्नर को तीन दिन में कार्रवाई के निर्देश
शिकायत पर एफआइआर दर्ज नहीं किए जाने को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।

HighLights

  1. शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, जबरन गर्भपात और धमकी के आरोपों पर याचिका
  2. मामला दर्ज कराने पर उसके खिलाफ हनी ट्रैप का प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा
  3. पुलिस पर आरोपित को बचाने और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने का आरोप भी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, जबरन गर्भपात, मारपीट और धमकी के आरोपों वाली शिकायत पर एफआइआर दर्ज नहीं किए जाने को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता की शिकायत पर तीन दिन के भीतर विधि अनुसार कार्रवाई कर उचित निर्णय लिया जाए।

मामला दर्ज कराने पर हनी ट्रैप का प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा

मामले के अनुसार पीड़िता ने 10 जुलाई 2026 को भोपाल के कमला नगर थाने में राजपाल अहिरवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि आरोपित ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में जबरन गर्भपात कराया। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने एफआइआर दर्ज करने के बजाय उसे धमकाया कि मामला दर्ज कराने पर उसके खिलाफ हनी ट्रैप का प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा।


विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई

याचिका में पुलिस पर आरोपित को बचाने और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया। पीड़िता ने भोपाल पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट की शरण ली। याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी रूपा पांडे, उपनिरीक्षक शैलेंद्र राजावत और महिला प्रधान आरक्षक डॉली चौरसिया के खिलाफ विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से अधिवक्ता एके शाह ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देशित किया कि शिकायत पर तीन दिन में कानून के अनुसार कार्रवाई कर उचित निर्णय लिया जाए। हालांकि, अदालत ने मामले के आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की और सक्षम अधिकारी को विधि सम्मत निर्णय लेने के निर्देश दिए।

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