
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में साफ किया कि यदि हुक्के में किसी भी तरह की प्रतिबंधित सामग्री या तंबाकू का उपयोग नहीं किया जा रहा है, तो जिला प्रशासन उसके संचालन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता।
मामला जबलपुर की एक निजी होटल की ओर से दायर याचिका से संबंधित था। होटल प्रबंधन ने हर्बल और फ्लेवर्ड हुक्का चलाने की अनुमति के लिए कोर्ट की शरण ली थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सार्वजनिक स्थानों पर केवल उन्हीं हुक्कों पर प्रतिबंध लागू होता है जिनमें तंबाकू या अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल होता है।
चूंकि उनके होटल में केवल हर्बल हुक्के का उपयोग किया जाएगा, इसलिए यह कानून के दायरे में आता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रशासन को समय-समय पर निरीक्षण करने की स्वतंत्रता रहेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हुक्के में तंबाकू युक्त प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग तो नहीं हो रहा।
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जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी निकालने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पेंशन अधिकारी नियमित रूप से पीपीओ जारी करते समय वसूली के आदेश पारित करते हैं।
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वे सभी जिले के पेंशन अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से अवगत कराएं। मुख्य सचिव उक्त आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं, ताकि भविष्य में अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सके।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी रोहणी प्रसाद पटेल की ओर से अधिवक्ता सचिन पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता 2017 में सब-इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुआ। सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी निकाल दी। उन्होंने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह और हाई कोर्ट के जगदीश प्रसाद के प्रकरण में स्पष्ट आदेश हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी नहीं निकाली जा सकती, भले ही सेवा के दौरान अंडरटेकिंग भरी हो।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध रिकवरी आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता से वसूली की गई है तो छह प्रतिशत ब्याज के साथ उसे 60 दिन के भीतर लौटाएं।