EOW की जांच पर हाई कोर्ट सख्त, बोला- 1996 में जन्मे व्यक्ति की संपत्ति की जांच 1997 से किस आधार पर
हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू से पूछा कि नाबालिग अवधि की संपत्ति जांच कैसे की गई। 1997-2021 की जांच पर सवाल उठाते हुए सात दिन में जवाब मांगा गया। ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 18 Mar 2026 10:25:49 PM (IST)Updated Date: Wed, 18 Mar 2026 10:25:49 PM (IST)
आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी। (फाइल फोटो)HighLights
- हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
- नाबालिग अवधि की संपत्ति जांच को कोर्ट ने अनुचित माना।
- 1997 से 2021 तक का चेक पीरियड विवाद में आया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। अनुपातहीन संपत्ति मामले में हाई कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि जब याचिकाकर्ता नाबालिग था, तो उसकी संपत्ति की जांच किस आधार पर की जा रही है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ईओडब्ल्यू के डीजी और उनके विधिक सलाहकार को सात दिन के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच की प्रक्रिया तर्कसंगत और कानूनी आधार पर होनी चाहिए।
नाबालिग अवधि की जांच पर सवाल
- याचिकाकर्ता कृष्ण प्रताप सिंह चंदेल की ओर से दलील दी गई कि उनका जन्म 1996 में हुआ और उन्हें 2023 में सरकारी नौकरी मिली। इसके बावजूद ईओडब्ल्यू ने 1997 से 2021 तक की अवधि को जांच अवधि मानते हुए उनकी संपत्ति की जांच शुरू कर दी।
- कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि जब याचिकाकर्ता उस समय नाबालिग थे। किसी सेवा में नहीं थे, तो उस अवधि की संपत्ति को आय से अधिक कैसे माना जा सकता है।
भाई के मामले में नाम जोड़ने पर विवाद
मूल एफआईआर याचिकाकर्ता के भाई के खिलाफ दर्ज की गई थी, जो समिति प्रबंधक थे। उन पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप था। बाद में जांच के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों के साथ याचिकाकर्ता का नाम भी जोड़ दिया गया।
नौकरी से हटाने की कार्रवाई पर भी सवाल
इसी आधार पर याचिकाकर्ता को सरकारी नौकरी से हटा दिया गया। याचिका में इसे अनुचित बताते हुए चुनौती दी गई है।