
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवांशिक रक्त विकार है, जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होता है। इसमें हीमोग्लोबिन के उत्पादन में कमी के कारण शरीर में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) हो जाती है।
अत: इस रोग को लेकर जागरूकता और समर्थन जरूरी है। इसका मुख्य उद्देश्य मरीजों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। शादी से पहले या गर्भावस्था के दौरान की जांच (स्क्रीनिंग) बहुत जरूरी है। यह सबसे प्रभावी रोकथाम है।
अगर माता-पिता दोनों को थैलेसीमिया माइनर है, तो बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने का 25 प्रतिशत जोखिम होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रोग पर हम विजय नहीं पा सकते। समय पर जांच से रोग पर नियंत्रण संभव है।
हमें यह भी समझना होगा कि लोगों में जागरूकता आएगी तो वे उपचार के लिए जल्दी आगे आएंगे और मरीजों का समय पर बेहतर उपचार कराना हमारा दायित्व है।
यह बात शुक्रवार को सीएमएचओ डा. नवीन कोठारी ने कही। वे जिला अस्पताल विक्टोरिया में थैलेसीमिया जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
विश्व थैलीसीमिया दिवस पर ऐतिहासिक जिला अस्पताल को लाल रोशनी से सजाया गया था। शाम ढलते ही यह आकर्षक रोशनी बरबस ही हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी।
शहरर के प्रतिष्ठित शासकीय जिला अस्पताल की स्थापना 1876 में हुई थी। इसे पहले "सिटी मेन हास्पिटल के नाम से जाना जाता था, जो आज भी 145 साल से अधिक पुरानी अपनी ऐतिहासिक इमारत में सेवाएं दे रहा है।
जिला अस्पताल विक्टोरिया और सरकारी संस्था पार्थ केे संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को विश्व थैलीसीमिया दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।इस मौके पर नोडल अधिकारी डा. केके वर्मा, डा. संजय जैन, प्रबंधक अरुण शाह, डा. विकास ठाकुर उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि कई लोगों में थैलेसीमिया का हल्का या छिपा हुआ रूप हो सकता है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती। समय पर जांच और जागरूकता से बीमारी की जटिलताओं को कम किया जा सकता है और जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।
जिला अस्पताल परिसर में कार्यक्रम में 2 से 8 वर्ष आयुवर्ग के 25 पीड़ित बच्चे पालकों के साथ कार्यक्रम में उपस्थित थे। ये बच्चे धीरे धीरे स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। इन्हें उपहार बांटे गए, साथ ही स्वरुचि भोज कराया गया। सभी बच्चे जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए थे।
थैलेसिमिया को लेकर जागरूकता कार्यक्रम की दूसरे चरण में निबंध व पोस्टर स्पर्धा का आयोजन किया गया। जिसमें 50 से अधिक नर्सिंग स्टूटेंड ने शिरकत की। इसके बाद 100 से अधिक चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ व अन्य ने रैली में भाग लिया। सत्र का समापन नुक्कड़ नाटक से हुआ।
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