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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पाटन के आगासौद गांव में आवारा कुत्ते के आतंक ने लोगों को दहलाकर रख दिया है। घटना 14 मई, गुरुवार शाम लगभग चार बजे की है, जब दो मासूम बहनों पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया।
तीन वर्षीय बड़ी बहन पर घर के बाहर हमला किया तो ढाई माह की छोटी बहन को आवारा कुत्ता कमरे से उठाकर ले भागा। इस दौरान मां के साहस से दोनों बच्चियों की जान बची, हालांकि निजी अस्पताल में उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना के संबंध में बरगी, पाटन निवासी सुलोचना भवेदी ने बताया कि वह पति नरेश व बच्चों के साथ आगासौद गांव में रहकर खेतों में मजदूरी करती है। एक किसान ने उन्हें खेत में बना झोपड़ीनुमा कच्चा घर रहने के लिए दिया है। उसकी दो बेटियां प्राची तीन वर्ष तथा पूर्वी ढाई माह की है।
गुरुवार शाम लगभग चार बजे बड़ी बेटी प्राची घर के बाहर खेल रही थी। इस दौरान वह कमरे में थी तथा छोटी बेटी सो रही थी। तभी अचानक एक आवारा कुत्ता घर के बाहर पहुंचा और प्राची पर हमला कर दिया। प्राची की चीख पुकार सुनकर वह घर से बाहर निकली तथा बेटी को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाने का प्रयास किया।
तब तक कुत्ते ने प्राची का चेहरा व शरीर को जगह-जगह बुरी तरह नोंच चुका था। प्राची को छोड़कर कुत्ता घर में जा घुसा और पूर्वी को जबड़े से दबोचकर वहां से भागने लगा। कुत्ते का पीछा कर उसने पूर्वी को बमुश्किल उसके चंगुल से छुड़ाया। दोनों बेटियों के शरीर में जगह-जगह गहरे घाव हो गए हैं।
सुलोचना ने कहा कि क्षेत्रीय नागरिक रजनेश दुबे ने सहायता की तथा दोनों बेटियों को बिना देर किए निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। इधर, इस घटना ने एक बार फिर न सिर्फ शहर बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवारा कुत्तों के खतरे को उजागर कर दिया है।
नगर निगम द्वारा आवारा श्वानों को पकड़ कर उनका बधियाकरण किए जाने के दावों के बीच सड़क पर आवारा श्वानों का खौफ बढ़ता जा रहा है। कब कौन सा श्वान आक्रामक होकर राह चलते लोगों पर हमला कर दे कहा नहीं जा सकता। आवारा श्वानों के प्रति नगर निगम शुरू से ही लापरवाह रहा है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन भी नहीं किया जा रहा है। शहर में आवारा श्वानों की संख्या बढ़कर लगभग एक लाख के पार पहुंच गई है परंतु नागरिकों को उनके खौफ से निजात दिलाने अब तक एक भी शेल्टर होम नही बन पाए हैं। जहां खूंखार श्वानों को भी रखा जा सके।
अलबत्ता बधियाकरण के नाम पर जरूर नगर निगम प्रति श्वान एक हजार रुपये खर्च कर रहा है। पिछले 15 वर्षो में श्वानों के बधियाकरण पर नगर निगम साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुका है। जबकि शहर में आवारा श्वानों की संख्या अब भी लगातार बढ़ रही है।
आवारा श्वानों ने सिर्फ सड़क, फुटपाथ पर पल और बढ़ रहे हैं बल्कि गली, मोहल्ला, कालोनी और अपार्टमेंट के आस-पास भी आश्रय स्थली बना लिए हैं। इनकी बढ़ती तादाद से कालोनी, अपार्टमेंट के रहवासी डर के बीच आवागमन करने विवश है। पंचशील कालोनी, कठौंदा के पास स्थित ग्रीन सिटी के रहवासी बच्चों को लेकर हमेशा ही चिंतित रहते हैं। क्योंकि स्कूल आते-जाते समय कई बार आवारा श्वान बच्चों पर हमला कर चुके हैं।
कालोनीवासियों ने नगर निगम की जनसुनवाई से लेकर अफसरों तक व्यक्ति रूप से शिकायत करते हुए आवारा श्वानों से छुटकारा दिलाने की मिन्नतें पर इस समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया। आवारा श्वान शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी पलीता लगा रहे हैं।
इधर नगर निगम प्रशासन का दावा है कि आवारा श्वानों के बधियाकरण का कार्य जारी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के परिपालन में 60 से 65 पिंजरे यानि डाग हाउस बढ़ाएं गए हैं। इस तरह अब 126 पिंजरे हो गए है। जहां श्वानों को बधियाकरण के बाद रखा जाता है। नगर निगम के अनुसार फरवरी 2026 से अब तक 2200 श्वानों का बधियाकरण किया जा चुका है।
यह भी जानें
नोट: सभी परिस्थितियों में रैबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
वर्ष-लगाए गए इंजेक्शन
(विक्टोरिया अस्पताल के आंकड़े)
कुत्ते के हमले में घायल होने की दशा में झाड़फूंक का सहारा नहीं लेना चाहिए। समय रहते रैबीज का इंजेक्शन न लगवाने, उपचार में लापरवाही करने पर हाइड्रोफोबिया बीमारी का खतरा रहता है। चिकित्सीय परामर्श से रैबीज का इंजेक्शन अनिवार्य रूप से लगवाना चाहिए।
-डा. नवीन कोठारी, सीएमएचओ
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