
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरगी बांध क्रूज हादसे के मुख्य साक्ष्य क्रूज के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए हैं। इस रवैये ने एकल जांच आयोग के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ऐसे में एकल जांच आयोग अपनी रिपोर्ट में मुख्य साक्ष्य क्रूज के टुकड़े किए जाने के बिंदु पर एफआइआर की अनुशंसा कर सकता है।
हाई कोर्ट व जिला अदालत, जबलपुर के विधि विशेषज्ञों के अनुसार किसी क्रूज हादसे में जांच के दौरान साक्ष्य (सबूत) मिटाना एक गंभीर अपराध है। यदि कोई व्यक्ति, क्रू-मेंबर या अधिकारी हादसे के कारणों, लापरवाही (जैसे इंजन की खराबी) या सुरक्षा खामियों को छिपाने के लिए सबूत नष्ट करता है, तो भारतीय कानूनों के तहत उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होती है।
भारतीय दंड संहिता (आइपीसी)/ बीएनएस के तहत मुकदमा: सबूत मिटाने, गलत जानकारी देने, या साक्ष्य गायब करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं (जैसे धारा 238, जो पूर्ववर्ती आईपीसी की धारा 201 के समान है) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।
दोषी पाए जाने पर कारावास की सजा और भारी जुर्माने का प्रविधान है। सजा की अवधि अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है।
यदि हादसे में सरकारी विभाग या क्रूज संचालक की लापरवाही (फिटनेस जांच में चूक या चेतावनी की अनदेखी) सामने आती है और वे इसे छिपाते हैं, तो उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है और उनके खिलाफ भी एफआइआर दर्ज होती है।
गंभीर मामलों में सरकार द्वारा न्यायिक आयोग गठित किए जाते हैं। यदि साक्ष्य मिटाने की पुष्टि होती है, तो यह माना जाता है कि संबंधित व्यक्ति किसी बड़ी साजिश या लापरवाही को छिपाने का प्रयास कर रहा था।
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