
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। उम्र के साथ चेहरे बदल गए, बालों की रंगत बदल गई, लेकिन स्कूल की यादें आज भी वैसी ही हैं। रविवार को मॉडल हाई स्कूल का परिसर उस समय भावनाओं से भर उठा, जब दशकों बाद पूर्व छात्र अपने पुराने स्कूल, गुरुओं और सहपाठियों के बीच लौटे। किसी ने गुरु के चरण छुए तो किसी ने पुराने दोस्त को गले लगाकर बीते दिनों को फिर जी लिया।
‘मैं आज बेहद भावुक हूं। मेरे पास शब्द नहीं हैं। अपने सहपाठियों और गुरुओं को अपने बीच पाकर रोम-रोम हर्षित हो उठा है। करीब 47 साल बाद उसी स्थान पर खड़ा हूं, जहां मेरा बचपन बीता और शिक्षा मिली। एक पल के लिए विश्वास ही नहीं होता कि समय इतना आगे आ गया है।’
ये भाव एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) विभास पांडे के थे। वे रविवार को मॉडल हाई स्कूल (पंडित लज्जाशंकर झा उमा उत्कृष्ट विद्यालय) के भूतपूर्व छात्रों के संगठन मॉडेलियन के 55वें गुरूवंदन-पुनर्मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। पांडे 1979 बैच के पूर्व छात्र हैं।
55 साल से चली आ रही गुरु को नमन की परंपरा
शिवप्रसाद निगम स्मृति प्रेक्षागृह (ड्राइंग हॉल) में आयोजित समारोह में पूर्व छात्रों और गुरुजनों का आत्मीय स्वागत किया गया। गुरूवंदन की यह परंपरा वर्ष 1970 में स्वर्गीय रामेश्वर प्रसाद गुरु ने शुरू की थी, जो आज भी उसी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ जारी है।
कार्यक्रम में सांसद आशीष दुबे, विधायक अभिलाष पांडे सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि एयर मार्शल विभास पांडे, प्राचार्य डॉक्टर संजय परिहार, वरिष्ठ पूर्व शिक्षक प्रोफेसर गिरिजाशंकर चौकसे और डॉक्टर हरप्रसाद स्थापक सहित मॉडेलियन पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया।
डॉक्टर राधाकृष्णन, पंडित लज्जाशंकर झा, शिवप्रसाद निगम और रामेश्वर प्रसाद गुरु के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
परिचय के साथ गूंजती रहीं तालियां
समारोह का सबसे रोचक और भावुक पड़ाव रहा स्वपरिचय। मंच से पूर्व छात्र अपना नाम, बैच और उपलब्धियां बताते गए और सामने बैठे पुराने सहपाठी तालियों से उनका स्वागत करते रहे। 95 वर्षीय शरद चंद्र पालन समारोह में उपस्थित सबसे वरिष्ठ माडेलियन रहे।
उन्होंने 1951 में मैट्रिक पास किया था। इस वर्ष 1951 बैच का हीरक जयंती वर्ष भी मनाया गया। वहीं 1943 बैच के कर्नल एसएस दवे ने इस वर्ष 100 वर्ष की आयु पूरी की, जिसका समारोह में अभिनंदन किया गया।
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तीन बैच, तीन पड़ाव और यादों का एक मंच
रविवार का पुनर्मिलन तीन बैचों के लिए खास रहा। 1951 बैच का हीरक जयंती, 1976 बैच का स्वर्ण जयंती और 2001 बैच का रजत जयंती वर्ष मनाया गया। शहर ही नहीं, प्रदेश, देश और विदेश से आए 300 से अधिक पूर्व छात्रों और गुरुजनों ने समारोह में हिस्सा लिया। मंच संचालन बांके बिहारी ब्यौहार, अखिल मिश्र, युवराज गढ़ावाल और हेमंत दवे ने किया।
मैं 1957 बैच का मॉडेलियन हूं, अपने स्कूल पढ़ाई छोड़ने के बाद पहली बार आकर मन गदगद हो गया। गुरूओं से जो ज्ञान पाया वही जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में बतौर सिविल का प्रोफेसर बन छात्रों से साझा करने के प्रयास किया। अब रिटायरमेंट लाइफ इंज्वाय कर रहा हूं।
नरेश कुमार शर्मा, पूर्व छात्र मॉडल स्कूल
मैंने 1942 में यहां प्रवेश पाया और 11वीं तक की पढ़ाई पूरी कर दूरसंचार विभाग में अपनी सेवाएं दी। अपने पुराने मित्रों को यहां पाकर मन खुशी से फूला नहीं समा रहा है। बहुत आनंद का अनुभव महसूस कर रहा। मुझे बुलाया गया यह बहुत बड़ी बात है।
सुरेश चंद्र तोपखाने वाले, पूर्व छात्र मॉडल स्कूल
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