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जबलपुर में भी लखनऊ जैसे हादसे का इंतजार, 280 कोचिंग सेंटर रिकार्ड में, चल रहे एक हजार, आने-जाने के लिए एक ही द्वार

इतने सारे कोचिंग संस्थानों में सिर्फ आठ से 10 ने ही फायर सेफ्टी नियम व नेशनल बिल्डिंग कोड का पालन करते हुए नगर निगम से फायर एनओसी ली है। बाकी संस्थान ...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 10:07:51 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 10:07:51 AM (IST)
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जबलपुर में भी लखनऊ जैसे हादसे का इंतजार, 280 कोचिंग सेंटर रिकार्ड में, चल रहे एक हजार, आने-जाने के लिए एक ही द्वार
 यातायात थाना रोड पर संचालित कोचिंग संस्थान, यहां प्रवेश निकासी के लिए एक ही द्वार। नईदुनिया

HighLights

  1. नोटिस दरकिनार, नहीं चेते जिम्मेदार, कोचिंग सेंटर भी डाल रहे जोखिम में जान
  2. नगर निगम ने 325 होटल-अस्पताल, कोचिंग व अन्य प्रतिष्ठानों को जारी किए थे नोटिस
  3. 200 ने जमा किया फायर सेफ्टी आडिट रिपोर्ट उसमें भी 50 प्रतिशत में खामी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दिल्ली के बाद लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्नि हादसे के बाद भी जिम्मेदार उदासीन है। शहर में संचालित होटल-अस्पताल, कोचिंग संस्थान सहित अन्य प्रतिष्ठानों में अग्नि हादसे निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम न होने के बाद भी प्रतिष्ठान धड़ल्ले से संचालित है।

21 लोगों की मौत के बाद से निगम प्रशासन ने सबक लिया

जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस विभाग पहले दिल्ली और अब लखनऊ में हुए भीषण हादसे के बाद भी नहीं चेत रहा है। जांच और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही है। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल-रेस्टोरेंट हुए भीषण अग्नि हादसे में 21 लोगों की मौत के बाद से निगम प्रशासन ने सबक लिया।


50 प्रतिशत की रिपोर्ट में कमियां सामने आ रहीं हैं

325 होटल-अस्पताल, कोचिंग सेंटर व अन्य प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए और 72 घंटे के भीतर फायर आडिट रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए। परंतु करीब 17 दिन बीत जाने के 200 प्रतिष्ठान संचालकों ने फायर आडिट रिपोर्ट जमा की है। उसमें भी 50 प्रतिशत की रिपोर्ट में कमियां सामने आ रहीं हैं।

अधिकांश होटल-अस्पताल और कोचिंग संस्थान में पुख्ता इंतजाम नहीं

इससे स्पष्ट है कि शहर में अधिकांश होटल-अस्पताल और कोचिंग संस्थान में अग्नि हादसों से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। वे नागरिकों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। खासतौर से कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

280 कोचिंग सेंटर ही रिकार्ड में, चल रहे एक हजार

शहर भर में करीब एक हजार से अधिक कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। जिसमें विद्यार्थियों को मैथ्स, साइंस, बायो, फिजिक्स, कैमेस्ट्री की पढ़ाई से लेकर इंजीनियरिंग, नीट, आइएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां कराई जाती है। इसमें भी नगर निगम के रिकार्ड में करीब 280 संस्थान ही दर्ज हैं।

सिर्फ आठ से 10 ने ही नगर निगम से फायर एनओसी ली

इतने सारे कोचिंग संस्थानों में सिर्फ आठ से 10 ने ही फायर सेफ्टी नियम व नेशनल बिल्डिंग कोड का पालन करते हुए नगर निगम से फायर एनओसी ली है। बाकी संस्थान बिना फायर एनओसी और बिना अग्नि सुरक्षा के इंतजाम किए ही धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश कोचिंग दड़बेनुमा कमरों में संचालित हो रहे हैं। जिसमें मात्र एक ही प्रवेश और निकासी द्वार हैं। जहां छोटा सा भी अग्नि हादसा बड़ा स्वरूप ले सकता है।

कार्रवाई की औपचारिकता

फायर सेफ्टी के पूरे इंतजाम न करने पर नगर निगम द्वारा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई भी की जा रही है परंतु ये दिखावा साबित हो रही है। नौ जून को नगर निगम के अग्नि शमन शाखा द्वारा मानक पूरे न करने पर एक कोचिंग सेंटर सील कर दिया था। क्योंकि भवन में स्थापित अग्निशमन व्यवस्थाएं क्रियाशील अवस्था में नहीं थीं और सभी आवश्यक अग्निशमन स्थापनाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।

आवाजाही के रास्तों की चौड़ाई भी पर्याप्त नहीं

भवन में आवागमन के लिए केवल एक ही मार्ग था, जबकि गलियारों और आवाजाही के रास्तों की चौड़ाई भी पर्याप्त नहीं पाई गई। गलियारों और आवागमन मार्गों में ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया गया था तथा भवन में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। भवन विभाग द्वारा यह भी पाया गया कि भवन का उपयोग स्वीकृत प्रयोजन से भिन्न रूप में किया जा रहा था। जबकि कुछ दिन बाद कोचिंग सेंटर पुन:पहले की तरह संचालित हो रहा।

फायर सेफ्टी रिपोर्ट में मानको की अनदेखी

नगर निगम में पहुंची 200 फायर आडिट रिपोर्ट में 50 प्रतिशत में खामियां सामने आ रही हैं। किसी के पास बिल्डिंग का नक्शा नही था तो किसी के पास फोटोग्राफ नही हैं। इलेक्ट्रानिक वायरिंग, आेवर हिटिंग जैसे कालम भी खाली थे।

होटलों में अनिवार्य फायर सेफ्टी मापदंड

  • फायर एनओसी एवं उसका नियमित नवीनीकरण
  • आटोमैटिक फायर अलार्म सिस्टम
  • प्रत्येक मंजिल एवं कमरों में स्मोक डिटेक्टर
  • पर्याप्त संख्या में अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर)
  • फायर हाइड्रेंट एवं पाइपलाइन नेटवर्क
  • स्प्रिंकलर सिस्टम
  • अग्निशमन के लिए आरक्षित जल भंडारण टैंक
  • आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) और वैकल्पिक सीढ़ियां।
  • प्रकाशयुक्त एग्जिट साइन बोर्ड
  • इमरजेंसी लाइटिंग एवं बैकअप बिजली व्यवस्था।
  • सुरक्षित और मानक अनुरूप विद्युत वायरिंग।
  • निकास मार्गों और सीढ़ियों का पर्याप्त चौड़ा एवं अवरोध-मुक्त नहीं होना
  • कर्मचारियों का नियमित फायर सेफ्टी प्रशिक्षण

325 होटल, अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए थे। होटल, कोचिंग की जांच कर तालाबंदी की कार्रवाई भी की थी। अब तक करीब 200 प्रतिष्ठानों ने फायर आडिट रिपोर्ट जमा की है। हालांकि इनमें से कुछ मानक पूरे नही कर रहे हैं। कोचिंग संस्थानों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

कुशाग्र ठाकुर, फायर अधीक्षक

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