
राहुल रैकवार, नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर (Jabalpur News)। जबलपुर के मझौली ब्लाक का खुड़ावल गांव देशभक्ति की अनूठी मिसाल पेश करता है। इस गांव की मिट्टी में देशप्रेम इस कदर रचा-बसा है कि यहां लगभग हर दूसरे घर से एक युवा देश की रक्षा में प्रण-प्राण से जुटा है। 2019 में पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए सीआरपीएफ के जवान अश्विनी कुमार काछी भी इसी गांव के थे।
जवान का बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरित करता है। अश्विनी का परिवार उनके बलिदान को यादकर रोजाना पूजता है। सेवानिवृत्त सैनिक युवाओं को देशभक्ति की प्रेरणा देते हैं और उन्हें राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार भी करते हैं।
जिला मुख्यालय से 53 किलोमीटर दूर इस गांव के लोगों की रगों में देशभक्ति का जुनून इस कदर समाया है कि भारतीय सेना में होने वाली हर भर्ती में यहां का युवा अवश्य शामिल होता है। अब तक इस गांव के तीन सपूत देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। आज भी यहां के युवा सुबह-शाम सैन्य भर्ती के लिए गांव में पसीना बहाते देखे जा सकते हैं।

खुड़ावल गांव में बलिदानियों की याद में बना स्मारक।
लगभग तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में आज भी सेवानिवृत्त सैनिक युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देकर देश सेवा के लिए तैयार करते हैं। वर्तमान में इस गांव के लगभग 50-55 युवा भारतीय सेना, सीआरपीएफ और अन्य सशस्त्र बलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इतने ही सेवानिवृत्त वीर सपूत इस गांव में हैं। अब तो यहां की बेटियां भी देश की रक्षा के लिए आगे आने को आतुर हैं। ऐसी ही यहां कि बेटी पूजा पटैल है का हाल ही में सीआरपीएफ में चयन हुआ है। पहलगाम बाद देश में उमड़े आक्रोश ने खुड़ावल के हर व्यक्ति के मन में नया जोश भर दिया है। खुड़ावल वीर जवानों का गांव कहलाता है। उनकी याद में गांव में बलिदानी स्मारक भी बनवाया गया है।

बलिदानी अश्विनी कुमार काछी का वह कमरा जहां उनको सुबह-शाम पूजा जाता है।
गांव के इकलौते मैदान में सेवानिवृत्त फौजी गांव के युवाओं को देश की सेवा के लिए तैयार रहने का प्रशिक्षण देते हैं। जब भी सेना में भर्ती होती है तो आसपास के गांव जिसमें दर्शनी, गुरुजी, गौरहा, भिटोनी, हरदुआ के युवा खुड़ावल पहुंचकर पूर्व सैनिकों की मदद से शारीरिक तैयारी और प्रशिक्षण लेते हैं।
प्रशिक्षण का असर ही कहें कि भर्ती में किसी न किसी युवा का चयन जरूरत होता है। ग्रामीणों के मन में इस मैदान को सुविधायुक्त बनाने की कसक है। वे कहते हैं कि मैदान दुरुस्त होगा तो युवाओं को बेहतर मदद मिलेगी।

खुड़ावल गांव के सरपंच गजेंद्र खंपरिया बताते हैं कि गांव के सबसे पहले सैनिक उनके चाचा शिव कुमार खंपरिया वर्ष 1975 में बने। इसके बाद कुछ और युवा भारतीय सेना व सशस्त्र बलों में शामिल हुए। तीन जून 2005 को बालाघाट जिले में माओवाद ऑपरेशन के दौरान खुड़ावल से पहला बलिदान राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय ने दिया। इनके बलिदान ने गांव के हर युवाओं में देशभक्ति का जोश भर दिया।
इसके बाद खुड़ावल निवासी रामेश्वर लाल पटेल जो कि ग्रेनेडियर्स में जम्मू कश्मीर में पदस्थ रहे। कुपवाड़ा में हुए आतंकी हमले में 19 जून 2016 को बलिदान दिया। इस गांव से अखिरी बलिदान सीआरपीएफ की 35वीं बटालियन में तैनात अश्विनी कुमार काछी ने दिया जो कि पुलवामा में 14 फरवरी, 2019 को हुए आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए थे।