पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज व राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा के बीच कानूनी लड़ाई खत्म
दरअसल, तन्खा ने आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पंचायत चुनावों पर रोक के लिए दोषी ठहराया। ऐसा करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंतरि ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 03 Feb 2026 07:59:54 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Feb 2026 08:08:01 PM (IST)
शिवराज सिंह चौहान और विवेक तनखा।HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने समझौते को अभिलेख पर लेकर मानहानि प्रकरण निरस्त किया।
- तन्खा का आरोप था, शिवराज ने पंचायत चुनावों पर रोक के लिए दोषी ठहराया।
- यह मामला 2021 में हुए मध्य प्रदेश के पंचायत चुनावों से संबंधित बताया जाता है।
नईदुनिया प्रतििनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व राज्यसभा सदस्य विवेक कृष्ण तन्खा के बीच लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के सुझाव के बाद, दोनों नेताओं ने लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत का रास्ता चुना।
संसद में मुलाकात और बातचीत के बाद, विवेक तन्खा ने चुनाव के दौरान दिए गए बयानों के संबंध में दायर किए गए सिविल और आपराधिक मानहानि के मामलों को वापस लेने का फैसला किया।
समझौते को अभिलेख पर लेते हुए करते सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेlा व न्यायमूर्ति एनके सिंह की युगलपीठ ने मानहानि के प्रकरण को निरस्त करने का राहतकारी आदेश पारित कर दिया।
दरअसल, तन्खा ने आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पंचायत चुनावों पर रोक के लिए दोषी ठहराया। ऐसा करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों को गलत तरीके से पेश किया।
इसी के व्यथित होकर उन्होंने मानहानि का नोटिस भेज दिया था। बाद में अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया, जो जबलपुर की एमपीएमएलए कोर्ट में विचाराधीन रहने के दौरान प्रकरण निरस्त कराने शिवराज सहित अन्य पहले हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए।
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10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग का था मामला
- यह मामला 2021 में हुए मध्य प्रदेश के पंचायत चुनावों से जुड़ा था। उन दिनों विवेक तन्खा वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े एक केस में पेश हुए थे।
- तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे लेकर कुछ बयान दिए थे। तन्खा का कहना था कि इन बयानों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा।
- इसे आधार बनाते हुए उन्होंने सिविल और क्रिमिनल मानहानि केस दर्ज करवाए।
- सिविल केस में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की। वहीं, आपराधिक शिकायत में आईपीसी की धारा 500 के तहत कार्यवाही की मांग की।
- शिवराज सिंह चौहान की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अवगत कराया कि दोनों पक्ष संसद में मिले और वहां आपसी सहमति से विवाद का समाधान कर लिया।
- इसके बाद तन्खा ने दोनों मामलों को वापस ले लिया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की तरफ से आरोप वापस लेने के बाद आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।