
नईदुनिया प्रतिनिधि,जबलपुर। बारिश के पहले प्री मानसून में होने वाला बिजली मेंटेनेंस का काम अभी आधा भी नहीं हो सका है। काम की रफ्तार धीमी होने से मई के अंत तक मेंटेनेंस पूरा होने की संभावना है।
इस बीच गर्मी के बीच शहर में कई इलाके ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। कई व्यावसायिक क्षेत्रों में बिजली की आंख मिचौली से काम प्रभावित हो रहा है।
.jpg)
लगभग 450 से अधिक लाइन स्टाफ के जरिए यह कार्य हो रहा है। हाल ही में टीम ने 25 प्रतिशत मैंटेनेंस कर भी लिया है। इस माह के अंत तक इसे शत प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
जबलपुर संभाग के चीफ इंजीनियर एसके गिरिया और सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा लगातार फील्ड पर निकलकर मेंटेनेंस की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारी उन जगहों पर पहुंचे, जहां मैंटनेंस का काम किया जा रहा था।

अफसरों ने मैंटेनेंस के कार्य को देख। इस दौरान मातहतों को कहा कि आवश्यकनुसार कम से कम शट डाउन लिया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।
नगर संभाग विजय नगर और नगर संभाग उत्तर के आधीन खजरी खिरिया से जुड़े इलाके में बिजली की आंख मिचौली बनी हुई है यहां कई मशीन बनाने वाले और व्यापारी वर्ग है।बिजली बार-बार बंद होने की वजह से काम ठप हो रहा है।
.jpg)
ओमती और बहोराबाग इलाके में भी बिजली सप्लाई को लेकर लोगाें को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रांझी क्षेत्र में कई जगह बिजली की आपूर्ति बार-बार बंद हो रही है। अधिकारी इसे ट्रिपिंग बता रहे हैं।
अधीक्षण यंत्री से लेकर कार्यपालन अभियंता स्तर पर यदि उपभोक्ता संपर्क कर रहे हैं तो उन्हें समाधान मिल रहा है लेकिन सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के अलावा लाइन स्टाफ के फोन अधिकांश समय में नहीं उठते हैं।
उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बिजली क्षेत्र में जब बंद होती है तो वे सीधे लाइन स्टाफ को संपर्क करने का प्रयास करते हैं लेकिन फोन नहीं उठता है। बता दे कि कंपनी ने सभी नियमित कर्मचारियों को सीयूजी नंबर प्रदान किया हुआ है ताकि जनता और विभागीय स्तर पर सुलभता के साथ उपलब्ध रहे इसके बावजूद फोन नहीं उठाने की मनमानी जारी है।
बिजली की आपूर्ति बेहतर बनाने के लिए मेंटेनेंस का कार्य साल में दो बार किया जाता है। हम मानसून से पहले बिजली की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मेंटेनेंस बेहतर ढंग से करवा रहे हैं। अभी कुछ दिन कुछ इलाकों में परेशानी हो रही है लेकिन बारिश में बेहतर स्थिति बनी रहे इसके लिए प्रयास हो रहा है।
संजय अरोरा, अधीक्षण यंत्री शहर
यह भी पढ़ें- ग्रेजुएशन के बाद कर्मकांड में डिप्लोमा बन सकता है बेहतर करियर विकल्प, रोजगार की अपार संभावना