हाई कोर्ट से डॉक्टरों को बड़ी राहत, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के बदले मिलेंगे 30% तक बोनस अंक, 60 दिन में निराकरण के निर्देश
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का लाभ नियमानुसार प्रदान करने का राहतकारी आदेश पारित किया। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 04 Apr 2026 10:35:40 PM (IST)Updated Date: Sat, 04 Apr 2026 10:35:40 PM (IST)
हाई कोर्ट ने सुरक्षित किए सेवारत डॉक्टरों के अधिकार।HighLights
- मैहर के डॉक्टर की याचिका पर हाई कोर्ट का आदेश
- CMHO की अनुशंसा के बाद भी बोनस अंक न देना गलत
- हाई कोर्ट ने सुरक्षित किए सेवारत डॉक्टरों के अधिकार
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का लाभ नियमानुसार प्रदान करने का राहतकारी आदेश पारित किया। कोर्ट ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुशंसा-पत्र के आधार पर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने उप संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं को 60 दिन की मोहलत दी है। साथ ही इस बारे में अवगत कराने कहा है। ऐसा इसलिए ताकि याचिकाकर्ताओं को दूसरी बार कोर्ट न आना पड़े।
सिविल अस्पताल मैहर में पदस्थ डॉक्टर ने खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
याचिकाकर्ता मैहर निवासी डॉ. ओमप्रकाश पांडे सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता वर्तमान में सिविल अस्पताल, मैहर में चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत है। वह साल 2012 से निरंतर सेवा दे रहा है। उसने नीट पीजी परीक्षा 2025 उत्तीर्ण कर ली है, परंतु उसे बोनस अंक का लाभ प्रदान नहीं किया जा रहा है।
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नियमों के तहत 30 प्रतिशत तक बोनस अंक का है प्रावधान
मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा 28 जून, 2019 को जारी आदेश व भारतीय चिकित्सा परिषद के प्रविधानों के तहत ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों को प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत व अधिकतम 30 प्रतिशत अंक का सेवारत कोटा प्रदान किया जाना चाहिए। बोनस अंक प्रदान करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सतना द्वारा विधिवत अनुशंसा की गई थी। इसके बावजूद भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा लाभ प्रदान नहीं किया गया। इसीलिए हाई कोर्ट आना पड़ा।