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सिर्फ एक अंक से फेल हो रहा था मेडिकल छात्र, एमपी हाई कोर्ट ने पूछा- क्या बचाया जा सकता है एक साल?

कोर्ट ने पूछा कि क्या मेधावी छात्र को महज एक अंक ग्रेस देकर उसका साल बचाया जा सकता है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 02:35:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 02:35:04 PM (IST)
सिर्फ एक अंक से फेल हो रहा था मेडिकल छात्र, एमपी हाई कोर्ट ने पूछा- क्या बचाया जा सकता है एक साल?
MBBS छात्र का साल बचाने की गुहार।

HighLights

  1. MBBS छात्र का साल बचाने की गुहार
  2. 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
  3. चांसलर के जवाब पर अब टिकीं निगाहें

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सिर्फ एक अंक की कमी से मेडिकल छात्र का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की स्थिति पर हाई कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र राम नरेश कुशवाहा की याचिका पर न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब मांगा है।

एक अंक से अटका MBBS छात्र का साल

कोर्ट ने पूछा कि क्या मेधावी छात्र को महज एक अंक ग्रेस देकर उसका साल बचाया जा सकता है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। याचिका में छात्र ने बताया कि वह सेकंड प्रोफेशनल की नियमित कक्षाएं अटेंड कर रहा है। प्रथम वर्ष में केवल एक अंक की कमी के कारण उसके सामने आगामी परीक्षा में शामिल होने से वंचित होने और शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने का संकट है। उसने ग्रेस मार्क्स देने के निर्देश की मांग की है।


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अध्यादेश के तहत ग्रेस मार्क्स देने का प्रविधान

कोर्ट के समक्ष मध्यप्रदेश यूनिवर्सिटीज कामन आर्डिनेंस नंबर-6 के क्लाज 32 का प्रविधान रखा गया। इसके तहत कुलाधिपति को असाधारण और कठिन मामलों में ग्रेस मार्क्स देने की शक्ति होने की बात बताई गई। इस पर कोर्ट ने चांसलर से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या संबंधित प्रविधान के तहत छात्र को एक अंक ग्रेस दिया जा सकता है।

कोर्ट ने फिलहाल ग्रेस देने का आदेश नहीं दिया है। अब यूनिवर्सिटी के जवाब से स्पष्ट होगा कि नियमों के तहत छात्र का एक साल बचाने का रास्ता उपलब्ध है या नहीं।