बहुविवाह परंपरा पर MP हाईकोर्ट का अहम आदेश, कहा- बिना उचित साक्ष्य के मान्यता नहीं दे सकते
केवल आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपत्ति या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी है ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 20 Mar 2026 08:05:11 PM (IST)Updated Date: Fri, 20 Mar 2026 08:10:31 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।HighLights
- आदिवासी समाज में बहुविवाह की परम्परा का तर्क दरकिनार।
- दूसरी पत्नी का सम्पत्ति व नौकरी का दावा किया गया निरस्त।
- बिना उचित साक्ष्य के बहुविवाह को नहीं दी जा सकती मान्यता।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि बिना प्रमाण के किसी समाज में बहुविवाह की परंपरा को मान्यता नहीं दी जा सकती।
केवल आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपत्ति या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। इस मत के साथ कोर्ट ने शहडोल निवासी महिला की याचिका निरस्त कर दी।
तर्क दिया गया कि फूलमती मृतक की अकेली वैध पत्नी है। सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के रूप में उसी का नाम दर्ज है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
कोई मान्य दस्तावेज, परंपरा का प्रमाण या पूर्व न्यायिक निर्णय भी नहीं बताया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी।