MP हाई कोर्ट ने लंदन निवासी डॉक्टर के विरुद्ध निरस्त की दुष्कर्म की एफआईआर, कहा-सहमति से बने थे संबंध
लंदन निवासी जितिन के सेबेस्टियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र सिंह और अधिवक्ता अर्णव तिवारी ने पक्ष रखा। दरअसल, पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज करवा कर आ ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 19 Mar 2026 08:17:38 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Mar 2026 08:22:46 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।HighLights
- शादी का प्रलोभन देकर दुष्कर्म का लगा था आरोप।
- कोर्ट ने पाया-दो वर्ष तक सहमति से बने थे संबंध।
- वर्ष 2021 में उसकी दोस्ती आवेदक के साथ हुई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपठ ने अपने एक आदेश में कहा कि दो वर्ष तक लगातार शारीरिक संबंध रहे, तो यह स्पष्ट है कि आवेदक और पीड़िता के बीच का संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित था। यदि आवेदक ने पीड़िता से शादी का वादा किया था और उसे नहीं निभाया था तो पीड़िता का स्वाभाविक व्यवहार यह होता कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना बंद कर देती।
हालांकि, उसने दो वर्ष तक ऐसा नहीं किया। पीड़िता के इस व्यवहार से यह निष्कर्ष निकलता है कि वह आवेदक के साथ अपने शारीरिक संबंध में हमेशा से ही सहमति से शामिल थी। इस मत के साथ कोर्ट ने आवेदक के विरुद्ध गोहलपुर थाने में दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर निरस्त कर दी।
लंदन निवासी जितिन के सेबेस्टियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र सिंह और अधिवक्ता अर्णव तिवारी ने पक्ष रखा। दरअसल, पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज करवा कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 में उसकी दोस्ती आवेदक के साथ हुई। आवेदक ने उसके साथ ज्यादती की।
शादी का वादा किया और लगातार संबंध बनाए। जब वह गर्भवती हो गई तो शादी के वादे से आवेदक मुकर गया। इससे क्षुब्ध होकर उसने गोहलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता के आरोप झूठे हैं। यह दलील भी दी गई कि सीआरपीसी की धाराओं के तहत विदेश में हुई घटना की रिपोर्ट भारत में दर्ज नहीं करवा सकते।