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फर्जी ऑर्डरशीट मामला: निलंबित सिविल जज को हाई कोर्ट से झटका, कहा- केस पेंडिंग होने से नहीं रुकेगी जांच

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने फर्जी ऑर्डरशीट जारी कर आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को कथित...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 10:16:41 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 10:16:41 PM (IST)
फर्जी ऑर्डरशीट मामला: निलंबित सिविल जज को हाई कोर्ट से झटका, कहा- केस पेंडिंग होने से नहीं रुकेगी जांच
फर्जी ऑर्डरशीट मामला: निलंबित सिविल जज को हाई कोर्ट से झटका

HighLights

  1. निलंबित सिविल जज विजेंद्र सिंह रावत को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से झटका
  2. आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर नहीं रुकेगी विभागीय जांच: कोर्ट
  3. आईएएस संतोष वर्मा को फर्जी आदेश से लाभ पहुंचाने का है गंभीर आरोप

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने फर्जी ऑर्डरशीट जारी कर आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को कथित लाभ पहुंचाने के मामले में निलंबित सिविल जज विजेंद्र सिंह रावत को राहत नहीं दी है। कोर्ट ने विजेंद्र सिंह रावत की याचिका निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने का आधार लेकर विभागीय कार्यवाही नहीं रोकी जा सकती।

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि इंदौर में पदस्थापना के दौरान वर्ष 2020 के घटनाक्रम से जुड़े आपराधिक मामले और विभागीय जांच के आरोप समान हैं। ऐसे में विभागीय जांच जारी रहने से आपराधिक मुकदमे में उनके बचाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही करीब पांच वर्ष बाद आरोपपत्र जारी किए जाने को भी चुनौती दी गई।


राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं। एक न्यायिक अधिकारी पर फर्जी आदेश तैयार कर आरोपित को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप न्यायपालिका की साख से जुड़ा विषय है, इसलिए अनुशासनात्मक जांच में विलंब उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका पर जनता का विश्वास संवैधानिक व्यवस्था का आधार है। किसी न्यायिक अधिकारी के आचरण की जांच को आपराधिक मुकदमे के अंतिम निर्णय तक अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने विभागीय कार्यवाही को वैध मानते हुए याचिका निरस्त कर दी।

आईएएस बनने की चाह में फर्जी फैसला तैयार कराने का आरोप

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संतोष वर्मा प्रमोट होकर आईएएस बनना चाहते थे, लेकिन उनके खिलाफ पत्नी की शिकायत पर थाने में आपराधिक मामला दर्ज था। आरोप है कि आपराधिक प्रकरण से छुटकारा पाने और प्रमोशन का रास्ता साफ करने के लिए तत्कालीन सिविल जज विजेंद्र सिंह रावत के साथ मिलकर मुकदमे का फैसला होने से पहले ही फर्जी बरी आदेश तैयार कराया गया।

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फर्जीवाड़ा सामने आने पर एफआईआर दर्ज हुई। संतोष वर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। इसी प्रकरण में कथित संलिप्तता सामने आने पर तत्कालीन सिविल जज विजेंद्र सिंह रावत को निलंबित कर दिया गया था।