
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सरकार की नई नीति को चुनौती के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान अजाक्स और सपाक्स की ओर से दलीलें पूरी की गईं। सपाक्स ने हाई कोर्ट के सामने कर्मचारियों के ग्रेडेशन के आंकड़े भी रखे गए।
इस दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि नई प्रमोशन में आरक्षण नीति में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का कहां पर पालन किया गया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरबी राय मामले में बताई गई कमियों को पूरा करने के लिए सरकार ने क्या किया है। हाई कोर्ट ने पूछा कि पुरानी पॉलिसी में किन सुधारों के बाद नई पालिसी लाई गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी को नियत की गई है।
अजाक्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. केएस चौहान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि प्रमोशन में आरक्षण नीति-2025 के नियम 11 (1,2,3) सहित अन्य नियम पूर्णतः असंवैधानिक है, क्योंकि उक्त नियम सर्वप्रथम आरक्षित वर्ग की ग्रेडेशन लिस्ट बनाने का प्रविधान करती है तथा आरक्षित वर्ग के कर्मचारी जो मेरिट के आधार पर पदोन्नति हुए हैं उनको भी आरक्षित वर्ग में गणना करने का नियम प्रावधान करता है।
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एससी-एसटी वर्ग के लिए मेरिट पर प्रमोशन से संबंधित कोई भी प्रावधान नियमों में मौजूद नहीं है। भारत का संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के जजमेंट सहित कई फैसले हैं जो स्पष्ट प्रावधान करते हैं कि सर्वप्रथम अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे। तत्पश्चात आरक्षित वर्ग के एवं जो कर्मचारी मेरिट के आधार पर अनारक्षित में चयनित होंगे उनकी गणना आरक्षित वर्ग में किए जाने का उक्त नियमों में प्रावधान है।
सरकार का नया नियम पूर्ण रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के प्रतिकूल है। इस पर हाई कोर्ट के द्वारा कहा गया कि जब नियमों में इतनी बड़ी त्रुटि है तो आपने इससे चैलेंज क्यों नहीं किया। इस पर अजाक्स संघ की ओर से कहा गया कि संघ नहीं चाहता है कि न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रमोशन बाधित हो। सपाक्स की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।