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नईदुनिया, जबलपुर (अतुल शुक्ला)। जबलपुर के बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे के बाद मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई योजना पर काम शुरू किया है। पूरा फोकस इस बात पर है कि मौसम खराब होने की वजह से दोबारा ऐसा हादसा न हो। विभाग रियल-टाइम मौसम फोरकास्ट सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसके तहत हर क्रूज साइट पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे, ताकि मौसम की तत्काल और सटीक जानकारी मिल सके।
मप्र पर्यटन विभाग के जल क्रीड़ा सलाहकार राजेंद्र निगम ने बताया कि इसके लिए भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) से समन्वय किया जा रहा है, खासतौर पर वाटर टूरिज्म के लिए। साथ ही विभाग की आईटी टीम एक विशेष मोबाइल एप तैयार करेगी, जिसमें लाइव मौसम अलर्ट और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी। बरगी हादसे की वजहों का भी विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि नई एसओपी में जरूरी सावधानियां जोड़ी जा सकें।
बरगी में क्रूज से सबसे ज्यादा कमाई
जल पर्यटन के क्षेत्र में क्रूज संचालन से विभाग को बरगी में सर्वाधिक कमाई होती रही है। गांधी सागर, तवा और हनुवंतिया में एक-एक क्रूज संचालित हो रहे हैं, जबकि भोपाल की झील में क्रूज संचालन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के चलते बंद है। बरगी में दो क्रूज संचालित थे, जिनमें से एक पहले से बंद था और दूसरा हादसे में क्षतिग्रस्त हो गया। मैकल रिसोर्ट से संचालित क्रूज से वीकेंड पर तीन से चार लाख और सामान्य दिनों में डेढ़ से दो लाख रुपये तक की कमाई होती थी।
मृतकों और घायलों को राहत राशि
बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले 13 लोगों के स्वजन को चार-चार लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। 25 घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। वहीं पर्यटकों की जान बचाने में भूमिका निभाने वाले जल जीवन मिशन के 21 श्रमिकों को 51-51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। कुछ मामलों में बैंक खातों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
शव ले जाने से इन्कार, प्रशासन ने की व्यवस्था
क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले आयुध निर्माणी कर्मचारी कामराज आर और उनके बेटे श्रीतमिल का शव सोमवार सुबह शासकीय खर्च पर हवाई मार्ग से तमिलनाडु भेजा गया। इस दौरान फ्लाइट ऑपरेटर ने दुर्गंध के कारण शव ले जाने से इन्कार कर दिया था। जानकारी मिलने पर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अधिकारियों को डुमना विमानतल भेजकर स्प्रे की व्यवस्था कराई, जिसके बाद सुबह लगभग नौ बजे विमान ने त्रिची के लिए उड़ान भरी।
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