
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष किए जाने का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष करने पर सकारात्मक विचार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
मध्य प्रदेश के लिए यह मामला विशेष महत्व रखता है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहले ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की जानकारी रखी जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 के आदेश में भी कहा था कि मध्यप्रदेश सरकार और हाईकोर्ट दोनों इस वृद्धि के पक्ष में निर्णय ले चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को सामान्य सरकारी कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब मध्यप्रदेश के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष करने संबंधी प्रक्रिया को अंतिम रूप मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
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सुनवाई के दौरान विभिन्न राज्यों ने इस विषय पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने इस व्यवस्था को लागू करने पर वित्तीय बोझ बढ़ने की बात कही। नगालैंड ने तर्क दिया कि उसके राज्य में सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 58 वर्ष है, ऐसे में जजों के लिए इसे बढ़ाना प्रशासनिक व वित्तीय संतुलन बिगाड़ सकता है।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना ने जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के इस कदम का खुलकर समर्थन किया।