दहेज हत्या प्रकरण में क्रूरता साबित करना आवश्यक, MP हाई कोर्ट ने दोषमुक्ति को चुनौती देने वाली अपील निरस्त
डिंडौरी की जिला न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए आरोपित पति को दोषमुक्त करार दिया था। अपील दायर की गई। हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन की गवाह तथा म ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 28 Jan 2026 10:52:17 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Jan 2026 10:59:35 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का निर्णय।HighLights
- दोनों में प्रेम विवाह था, दहेज की मांग नहीं की थी।
- भाई भी बहन की शादी में शामिल नहीं हुआ था।
- मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट फेलियर था।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि दहेज हत्या प्रकरण में क्रूरता साबित करना आवश्यक है। अभियोजन पक्ष के गवाह यदि क्रूरता साबित नहीं कर पाते तो आरोपित को सजा से दंडित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने दोषमुक्ति के आदेश को चुनौती देने वाली अपील निरस्त कर दी। प्रकरण के अनुसार सुनीता से रणजीत सिंह से जून, 2020 में प्रेम विवाह किया था। सुनीता ने पति से हुए कथित झगड़े के बाद 29 अप्रैल, 2021 को खुद को आग लगा ली, अगले दिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
डिंडौरी की जिला न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए आरोपित पति को दोषमुक्त करार दिया था। अपील दायर की गई। हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन की गवाह तथा मृतिका की बहन ने स्वीकार किया कि दोनों में प्रेम विवाह था और दहेज की मांग नहीं की गई थी।
मृतिका की मां ने कहा कि विवाह से पूर्व सुनीता लगभग नौ माह आरोपित के साथ लिव इन रिलेशनशिप में थी। दोनों के विवाह से वे खुश नहीं थीं। भाई भी बहन की शादी में शामिल नहीं हुआ था।
मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट फेलियर था। युगलपीठ ने आदेश में कहा कि एक बार जब अभियोजन के गवाहों ने दहेज या इससे जुड़ी क्रूरता साबित नहीं की तो आरोपी को सजा नहीं हो पाती। जिला न्यायालय ने अपने फैसले में कोई गलती नहीं की है।