
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लान्ड्रिंग मामले में पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा ने अब कानूनी रणनीति बदलते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में मामले के आरोपों की सच्चाई पर सवाल नहीं उठाए गए हैं, बल्कि ईडी की शिकायत पर विशेष अदालत द्वारा संज्ञान लेने की प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है।
सौरभ शर्मा की याचिका का मुख्य आधार यह है कि विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेते समय कानून में तय प्रक्रिया का पालन किया या नहीं। मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने राज्य शासन और ईडी से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
हाई कोर्ट में दायर याचिका में हालिया सुप्रीम कोर्ट के निर्णय परविंदर सिंह बनाम ईडी का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि किसी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपित को सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।
सौरभ शर्मा का दावा है कि ED की शिकायत पर संज्ञान लेते समय उन्हें यह अवसर नहीं दिया गया, जिससे पूरा आदेश कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।
हाई कोर्ट के विधिवेत्ताओं के अनुसार यह याचिका इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें जांच के तथ्यों या आरोपों की मेरिट पर बहस नहीं की गई है। इसमें केवल न्यायिक प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है।
यदि अदालत प्रथम दृष्टया संज्ञान आदेश में कोई गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी पाती है तो इसका असर आगे की कार्यवाही पर भी पड़ सकता है।
13 जुलाई को होने वाली सुनवाई केवल सौरभ शर्मा के मामले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ईडी मामलों में संज्ञान लेने की प्रक्रिया और आरोपी को सुनवाई का अधिकार देने की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत दे सकती है।