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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ढाल बनाकर सौरभ शर्मा ने ईडी की कार्रवाई पर उठाए सवाल

दरअसल, हाई कोर्ट में दायर याचिका में हालिया सुप्रीम कोर्ट निर्णय परविंदर सिंह बनाम ईडी का हवाला देते हुए कहा गया है कि शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 11:17:06 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 11:21:37 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ढाल बनाकर सौरभ शर्मा ने ईडी की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सौरभ शर्मा।

HighLights

  1. संज्ञान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
  2. हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद
  3. 13 जुलाई पर टिकी निगाहें

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा ने अब मामले के तथ्यों से अधिक प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देते हुए नई कानूनी रणनीति अपनाई है। उनकी याचिका का केंद्र यह नहीं है कि आरोप सही हैं या गलत, बल्कि यह है कि विशेष अदालत ने ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेते समय कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया या नहीं।

मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने राज्य शासन और ईडी से जवाब मांगा है व अगली सुनवाई 13 जुलाई तय की है।

दरअसल, हाई कोर्ट में दायर याचिका में हालिया सुप्रीम कोर्ट निर्णय परविंदर सिंह बनाम ईडी का हवाला देते हुए कहा गया है कि शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपित को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

सौरभ शर्मा का दावा है कि यह अवसर दिए बिना संज्ञान लिया गया, जिससे पूरा आदेश कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।

जांच के गुण-दोष नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की वैधता को चुनौती

  • हाई कोर्ट के विधिवेत्ताओं के अनुसार यह याचिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जांच के गुण-दोष नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है।
  • यदि अदालत प्रथमदृष्टया संज्ञान आदेश में कोई गंभीर प्रक्रिया संबंधी त्रुटि पाती है, तो उसका असर आगे की कार्यवाही पर भी पड़ सकता है।
  • इस कारण 13 जुलाई की सुनवाई केवल सौरभ शर्मा के मामले तक सीमित नहीं रहेगी।
  • बल्कि ईडी मामलों में संज्ञान लेने की प्रक्रिया और आरोपित को सुनवाई के अधिकार की सीमा पर भी महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत दे सकती है।