OBC आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट नाराज, MP सरकार का कोई वकील नहीं हुआ पेश... सुनवाई टली
बहुचर्चित ओबीसी आरक्षण मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन मध्य प्रदेश शासन की ओर से कोई भी अधिवक्ता अदालत में उपस् ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 29 Jan 2026 11:21:56 PM (IST)Updated Date: Fri, 30 Jan 2026 05:43:11 AM (IST)
सुप्रीम कोर्ट में बहुचर्चित ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई टल गई (AI Generated Image)HighLights
- मप्र शासन का कोई वकील अदालत में उपस्थित नहीं
- न्यायमूर्ति नरसिम्हा व विजय विश्नोई की युगलपीठ
- कोर्ट ने सरकार की लापरवाही पर नाराजगी जताई
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति विजय विश्नोई की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को बहुचर्चित OBC आरक्षण मामले में बहस निर्धारित थी। जैसे ही सुनवाई का समय आया, यह स्पष्ट हुआ कि मध्य प्रदेश शासन की ओर से एक भी अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं है।
SC ने जताई कड़ी नाराजगी
इस स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। SC ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सरकार के अधिवक्ता ही उपस्थित नहीं हो रहे हैं, तो न्यायालय मामलों की सुनवाई कैसे कर सकता है। कोर्ट की इस टिप्पणी को गंभीर माना जा रहा है।
अगली सुनवाई 4 फरवरी को
ओबीसी वर्ग की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं के निवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार फरवरी को निर्धारित कर दी। इससे पहले कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन की इस लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन ने सुप्रीम कोर्ट में बहस के लिए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित पांच वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त किया है। इसके बावजूद गुरुवार को कोई भी वकील अदालत में मौजूद नहीं रहा।
पहले हर सुनवाई में लेते रहे समय
उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से महाधिवक्ता द्वारा ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराए गए हैं। अब तक प्रत्येक सुनवाई में महाधिवक्ता, महाधिवक्ता कार्यालय के एक दर्जन विधि अधिकारियों के साथ उपस्थित होकर समय लेते रहे हैं, लेकिन इस बार कोई भी वकील उपस्थित नहीं हुआ।
ओबीसी पक्ष के अधिवक्ता रहे मौजूद
ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जार्ज चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता जून चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं वरुण ठाकुर बहस के लिए अदालत में उपस्थित रहे।