
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरगी जलाशय में संचालित क्रूज सेवा को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सूत्रों की माने तो क्रूज में नेताओं, अधिकारियों और अन्य वीआइपी को बिना टिकट यानी मुफ्त यात्रा कराई जाती थी। इसके लिए रिसोर्ट के मैनेजर और क्रूज संचालक पर लगातार दबाव बना रहता था, जिसके चलते नियमों की खुलेआम अनदेखी की जाती रही। इस वीआइपी संस्कृति का सीधा असर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर पड़ा। कई बार क्रूज में तय क्षमता से अधिक लोगों को सवार किया गया।
इतना ही नहीं यात्रियों की गिनती और सुरक्षा मानकों का पालन केवल औपचारिकता बनकर रह गया था। हादसे के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। यही वजह है कि प्रारंभिक कार्रवाई में रिसोर्ट के मैनेजर, टिकट बुकिंग कर्मचारी से लेकर पर्यटन विभाग के आरएम के ऊपर गाज गिरी।
घटना के वक्त बचाव दल में जुटे एनडीआरएफ और एसडीआरएफ, दोनों दल के जवानों को क्रूज में सवार यात्रियों की संख्या की सही जानकारी नहीं मिली, जिससे यह पता लगाने में घंटों लग गए कि हादसे में कितने पर्यटक डूबे है। टिकट काउंटर से लेकर मैनेजर तक सही जानकारी नहीं दे पा रहे थे।
पहले उन्होंने 28 से 29 टिकट कटने की जानकारी दी और बताया कि इतने ही यात्री उस पर सवाल हैं, लेकिन लंबी मशक्कत के बाद जब क्रूज के पास लगे कैमरे की छानबीन की गई तो पता चला कि क्रूज में 29 नहीं बल्कि 43 लोग सवार थे, जिसमें से दो से तीन क्रू मेम्बर थे। इधर नियमानुसार बच्चों की टिकट न लगने की वजह से भी इनकी संख्या का पता लगाने में समय लगा।
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रिसोर्ट से जुड़े एक सूत्रों ने बताया कि क्रूज में मुफ्त का सफर करने वालों की लंबी लिस्ट है। इसमें जनप्रतिनिधि ही नहीं बल्कि प्रशासन, पुलिस के अधिकारी और कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इनकी टिकट माफ करने के लिए प्रशासनिक दबाव रहता था। कई बार कर्मचारियों द्वारा वीआइपी के टिकट काटने के दबाव की वजह से विवाद भी हो चुका है। जबकि इस वजह से क्रूज की आय भी प्रभावित होती है। आम दिनों में जहां 10 से 20 प्रतिशत लोग मुफ्त में यात्रा करते हैं तो वीकेंड में इनकी संख्या 25 से 30 प्रतिशत तक हो जाती थी।