
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे की जांच में सामने आ रहे तथ्यों ने पर्यटन विभाग की गंभीर खामियों की पोल भी खोल दी है।
शुक्रवार को जिला प्रशासन की टीम ने मैकल रिसोर्ट, बरगी पहुंचकर घटना के समय मौजूद कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जल जीवन मिशन से संबंधित उन मजदूरों के बयान भी लिए गए, जो क्रूज हादसे के दौरान पर्यटकों की जान बचाने के लिए बांध में उतरे थे।
एसडीएम अभिषेक सिंह और तहसीलदार पूर्णिमा की उपस्थिति में 35 मजदूरों, कर्मचारियों के बयान दर्ज हुए, जिसकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई। इधर, हाई कोर्ट में बरगी बांध क्रूज हादसे को लेकर शुक्रवार को एक और जनहित याचिका दायर की गई।
जबलपुर की सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा तिवारी ने याचिका में राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन व मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड को मामले में दोषी बताते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम का गठन करने की मांग की गई है। याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होगी।
पूर्व में जिला अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दोषियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद राजधानी भोपाल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कमल कुमार राठी ने हाई कोर्ट में इस हादसे को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी। क्रूज हादसे में 13 पर्यटकों की मौत हुई थी।
जल जीवन मिशन कार्य में मैनेजर विवेक पटेल, भोला रैकवार, शशि राजन, रमन बाजपेयी, वीरेंद्र यादव, सागर गुप्ता, रमजान सेठ, शहदुल सेठ, इब्राहिम, राजेश सैनी, अरविंद यादव के बयान दर्ज हुए। ये सभी क्रूज हादसे के दौरान सबसे पहले राहत व बचाव कार्य में जुटे थे।
मैनेजर विवेक ने कहा कि उनके पास पहले से लाइफ जैकेट, वाटर टायर और रस्सी आदि सुरक्षा सामग्री मौजूद थी। जिसके चलते घटना के दौरान ही उन्होंने रस्सियों और टायर की मदद से एक श्रृंखला बनाकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा सकीं। जिन महिलाओं की मौत हुई, उनमें से तीन ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। वे जल्द राहत व बचाव कार्य में न जुटते तो मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता था।