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मजदूरी करने सूरत गए माता-पिता पर टूटा दुख का पहाड़, झाबुआ में बिना मुंडेर के कुएं में डूबे दोनों बच्चे

रघु अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करने गुजरात के सूरत गया हुआ है। करीब पांच वर्षीय बेटी नंदिनी और नन्हे शनिराज को गांव में ही दादा -दादी के पास छोड़ा था ता...और पढ़ें

By vishal anand chhatiyeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 12:30:11 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 12:36:55 PM (IST)
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मजदूरी करने सूरत गए माता-पिता पर टूटा दुख का पहाड़, झाबुआ में बिना मुंडेर के कुएं में डूबे दोनों बच्चे
इस बिना मुंडेर के कुएं में डूबे बच्चे। (वीडियो ग्रैब)

HighLights

  1. थांदला क्षेत्र में हुई हृदय विदारक घटना, फिर बिना मुंडेर के कुएं ने ली बच्चों की जान
  2. माता-पिता अपने और परिवार के पेट की आग बुझाने के लिए सूरत में मजदूरी करने गए हुए हैं
  3. गांव में अपने नन्हें बेटे व बिटिया को वे दादा -दादी के पास छोड़कर गए हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, झाबुआ। माता-पिता अपने और परिवार के पेट की आग बुझाने के लिए सूरत में मजदूरी करने गए हुए हैं। गांव में अपने नन्हें बेटे व बिटिया को वे दादा -दादी के पास छोड़कर गए हैं। सोमवार को खेलते हुए दोनों मासूम कुछ खाद्यान्न सामग्री खरीदने घर से निकले थे। जब वापस नहीं लौटे तो उनकी खोजबीन हुई। देर शाम को उनके शव रास्ते में पड़ने वाले एक बिना मुंडेर के कुएं में मिली।

यह कुंए अत्यंत ही फिसलन भरा है और रास्ते पर ही हैं। यह हृदय विदारक घटना थांदला क्षेत्र के उदयपुरिया गांव में हुई है जहां मईडा परिवार पर गहरा वज्रपात हुआ है। रघु अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करने गुजरात के सूरत गया हुआ है। करीब पांच वर्षीय बेटी नंदिनी और नन्हे शनिराज को गांव में ही दादा -दादी के पास छोड़ा था ताकि वे स्कूल जा सकें। सोमवार को वे खेलते -खेलते फिसलन भरे कुएं में गिर गए। इस दुखद घटना में दोनों बच्चों की मौत हो गई। थांदला थाना प्रभारी अशोक कनेश और उनका दल सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचा। रात में ही दोनों बच्चों के शव कुंए से निकलवाए गए। मंगलवार को उनका पोस्टमार्टम किया गया।


लगातार हादसे, प्रशासन की लापरवाही

जिले में खुले कुओं के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। इससे पहले कल्याणपुर के पास 12 वर्षीय शिवानी की कुएं में डूबने से मौत हो चुकी है। वहीं झाबुआ के ग्राम खरड़ू छोटी में 70 वर्षीय तितली बाई की भी खुले कुएं में गिरने से जान चली गई थी।स्थानीय लोगों का कहना है कि तीनों घटनाओं में एक समानता रही-कुओं पर सुरक्षा के लिए मुंडेर नहीं थी।इसमें प्रशासन की लापरवाही है। क्योंकि पूर्व में हादसे होने के बाद भी सबक नहीं लिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खुले और असुरक्षित कुओं की पहचान कर वहां मुंडेर बनवाने या अन्य सुरक्षा इंतजाम करें। जिससे किसी की मौत न हो पाए।

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