
मुकेश तिवारी, नईदुनिया कटनी। 2011 में काम शुरू हुआ था। लागत भी 799 से बढ़कर 1400 करोड़ हो गई। स्थिति यह भी आई कि अमेरिका और जर्मनी से बुलाई गईं विदेशी मशीनें भी हांफ गईं। तब से दो मुख्यमंत्री भी बदल गए।
अब राहत की बात यह है कि यह टनल संभवत: जून तक बनकर तैयार हो जाएगी। हालांकि जून के अंत तक टनल के बनने के बाद मशीनों को बाहर निकालना चुनौती होगी। इसके लिए यहां एक बड़ा सीमेंटेड कुआं बनाया गया है, जहां से इन मशीनों को खोलकर कल-पुर्जे निकाले जाएंगे।
कल-पुर्जें को क्रेनों के माध्यम से 100 फीट गहरे कुएं से बाहर निकालने का कार्य प्रारंभ होगा। श्रमिकों व सामग्री को टनल के अंदर ले जाने बिछाई गई पटरी व अन्य सामग्री को भी बाहर निकाला जाएगा।
इससे पहले भी फरवरी 2022 में मशीन सुधारने के लिए बनाए गए कुएं में नौ श्रमिक धंस गए थे, जिसमें दो की मौत हो गई थी। यही वजह है कि इस बार पक्का कुआं बनाया गया है।
एनबीडीए के अनुसार नहर से अक्टूबर माह में पानी छोड़ा जाता है। उम्मीद है कि अक्टबूर से टनल के माध्यम से पांच जिलों की प्यास बुझ पाए।
जबलपुर से निकली यह नहर 195 किमी खुली है। नहर प्रारंभ होने से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर और रीवा की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
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