
नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। बिहार के अररिया से महाराष्ट्र व कर्नाटक के मदरसों में ले जाए जा रहे जिन 163 मुस्लिम बच्चों को कटनी जिले की पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया, उनको दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और आईबी के अधिकारी इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पा रहे हैं कि जब बिहार में ही हजारों मदरसे हैं तो फिर इतने बच्चों को हजार किलोमीटर से अधिक दूर कौन सी धार्मिक शिक्षा दिलाने के लिए ले जाया जा रहा था।
पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में जिन आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज की है, उनसे भी पूछताछ में इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पा रहा है। आरोपी यह कहकर चुप हो जा रहे हैं कि चूंकि वे भी महाराष्ट्र और कर्नाटक के इन मदरसों में पढ़े, इसलिए बच्चों को वहीं ले जा रहे थे।
ऐसे में सवाल यह है कि इन मदरसों में ऐसी कौन सी धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी, जो बिहार के मदरसों में नहीं दी जाती। पुलिस अधिकारियों को भी आशंका है कि इस मामले में धार्मिक शिक्षा की गहरी जड़ों की परत खुल सकती है।
महाराष्ट्र के लातूर व नांदेड़ गई पुलिस की टीमें जांच कर वापस लौट आई हैं। हालांकि जांच के बाद अभी तक मानव तस्करी जैसी बात सामने नहीं आई है। मदरसों में फंड आदि कहां से आता है, इसको लेकर भी जीआरपी ने जांच की है। दोनों टीमों ने मदरसों में जानकारी जुटाने के साथ दस्तावेज देखे हैं, जिसमें आवासीय शिक्षा देने की व्यवस्था की जानकारी मिली है।
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सामाजिक जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद तथ्यों के आधार पर जांच होगी। इस बीच बाल कल्याण समिति को बिहार के अररिया व उसके आसपास के जिलों के करीब सौ से अधिक बच्चों की सामाजिक जांच रिपोर्ट मिली है।
इन बच्चों को अब बिहार रवाना किया जा रहा है। हालांकि सभी आठ शिक्षक अभी कटनी में हैं और जीआरपी की ओर से उन्हें जांच के लिए बुलाया जा रहा है। इन शिक्षकों को नोटिस देकर कटनी के मुस्लिम समाज के सुपुर्द किया गया है।