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एमपी में गजब का फर्जीवाड़ा... भतीजे की डिग्री पर चाचा बन बैठा डॉक्टर, एक ही नाम पर 3 जिलों में डॉक्टर की नौकरी

अब इस प्रकरण में नया मोड़ तब आया, जब खुद को वास्तविक डॉ. महेश चंद शर्मा बताने वाले एक एमबीबीएस चिकित्सक ने शहडोल के जयसिंहनगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज...और पढ़ें

By Vivek ParasharEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 10:38:27 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 10:38:27 PM (IST)
एमपी में गजब का फर्जीवाड़ा... भतीजे की डिग्री पर चाचा बन बैठा डॉक्टर, एक ही नाम पर 3 जिलों में डॉक्टर की नौकरी
भतीजे की डिग्री पर चाचा बन बैठा डॉक्टर (ये तस्वीर एआई से बनाई गई है)

HighLights

  1. एक ही नाम और दस्तावेज पर तीन जिलों में डॉक्टर की नौकरी का खुलासा
  2. रीवा लोकायुक्त की टीम ने आरोपी फर्जी डॉक्टर को रिश्वत लेते पकड़ा
  3. असली डॉक्टर ने अपने सगे चाचा पर लगाया धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप

नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। मध्य प्रदेश में एक ही व्यक्ति के नाम पर तीन जिलों में संविदा चिकित्सक की नियुक्ति का मामला अब और उलझ गया है। अब इस प्रकरण में नया मोड़ तब आया, जब खुद को वास्तविक डॉ. महेश चंद शर्मा बताने वाले एक एमबीबीएस चिकित्सक ने शहडोल के जयसिंहनगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके चाचा सतीश शर्मा ने उनके नाम और शैक्षणिक दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर प्रदेश के तीन जिलों में संविदा चिकित्सा अधिकारी की नौकरी हासिल की और वर्षों तक शासन से मानदेय भी लेते रहे।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में भोपाल के पीपल्स मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और वर्तमान में राजस्थान के डीग जिले के पूंछरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि उनके नाम और दस्तावेजों का उपयोग कर प्रदेश में कोई व्यक्ति डॉक्टर के रूप में कार्य कर रहा है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।


लोकायुक्त कार्रवाई के बाद खुली परतें

मामला तीन जुलाई को सामने आया, जब रीवा लोकायुक्त ने शहडोल जिले के ऊफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ संविदा चिकित्सक डॉ. महेश चंद शर्मा को कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने दस्तावेजों की जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि इसी नाम का चिकित्सक एक जून 2021 से श्योपुर जिले के सहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी पदस्थ है। वहीं फरवरी 2023 से खरगोन जिले के केली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसी नाम से संविदा चिकित्सक की नियुक्ति हुई थी। इससे एक ही नाम पर तीन जिलों में नौकरी किए जाने का मामला उजागर हुआ।

नाम और दस्तावेजों में भी किया गया कथित बदलाव

एनएचएम की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित ने अलग-अलग जिलों में नियुक्ति के लिए अपने तथा अपने पिता के नाम में मामूली बदलाव कर अलग-अलग दस्तावेज और तीन पैन कार्ड का उपयोग किया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर संविदा नियुक्तियां हासिल करने का संदेह है। खरगोन जिले से संबंधित रिकॉर्ड भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भेजे जा चुके हैं।

भोपाल में पहले ही दर्ज हो चुकी है एफआइआर

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की शिकायत पर भोपाल के चुनाभट्टी थाने में आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जा चुका है। एफआइआर में आरोप है कि फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर तीन जिलों में संविदा चिकित्सक की नियुक्ति लेकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

अब तीन जिलों के रिकॉर्ड की होगी जांच

शहडोल के जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय बैगा ने बताया कि दो जिलों के दस्तावेज पुलिस को मिल चुके हैं। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत एमबीबीएस डिग्री और अन्य प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। तीसरे जिले का रिकॉर्ड मिलने के बाद पूरे मामले की वैधानिक जांच आगे बढ़ाई जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि नियुक्ति प्रक्रिया में किन स्तरों पर लापरवाही हुई और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन जिलों में नियुक्ति कैसे संभव हुई।

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एक नजर में पूरा मामला

  • तीन जुलाई : शहडोल में लोकायुक्त ने संविदा चिकित्सक को कथित रिश्वत लेते पकड़ा।
  • जांच में खुलासा : वही नाम श्योपुर और खरगोन में भी संविदा चिकित्सक के रूप में मिला।
  • एनएचएम की जांच : अलग-अलग दस्तावेज, नाम में बदलाव और तीन पैन कार्ड का उपयोग मिलने की बात सामने आई।
  • भोपाल में एफआईआर : चुनाभट्टी थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज।
  • नया मोड़ : वास्तविक एमबीबीएस डॉक्टर ने सामने आकर आरोप लगाया कि उनके चाचा ने उनके नाम और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया।