नईदुनिया न्यूज, सनावद। जिले के सनावद क्षेत्र के ग्राम दसोड़ा के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ सामाजिक विज्ञान के शिक्षक भारतसिंह सोलंकी (घोंसला) का हार्ट केवल 20 प्रतिशत ही काम कर रहा है। इसके बावजूद उन्होंने 44 डिग्री तापमान के बीच 100 प्रतिशत जनगणना का कार्य पूरा कर लिया है।
उन्होंने साहस, समर्पण व कर्तव्यनिष्ठा की मिशाल पेश की है। भारत सिंह सोलंकी रोज सुबह 6 बजे गांव के लिए निकल पड़ते थे। उन्हें ग्राम दसोड़ा के 210 घरों की जनगणना का दायित्व मिला था, जिसे उन्होंने महज चार दिनों 4 से 8 मई के बीच शत-प्रतिशत पूरा कर लिया।
घर-घर जाकर जनगणना एप पर जानकारी दर्ज की
घर-घर जाकर उन्होंने जनगणना एप पर जानकारी दर्ज की और ग्रामीणों के अनेक सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब भी दिया। ग्रामीणों द्वारा परिवार, दस्तावेज, जानकारी के उपयोग और जनगणना प्रक्रिया को लेकर पूछे गए प्रश्नों का उन्होंने सहजता और आत्मीयता से समाधान किया।
साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को यह भी समझाया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश और गांव के विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने लोगों को बताया कि जनगणना के आधार पर ही शासन द्वारा सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं की योजनाएं तैयार की जाती हैं।
किसी का सहयोग नहीं लिया, भीषण गर्मी में अकेले डटे रहे
उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि इस पूरे कार्य के दौरान उन्होंने किसी का सहयोग नहीं लिया। भीषण गर्मी के बीच वे अकेले ही अपने लक्ष्य की ओर लगातार डटे रहे। दोपहर में गांव में ही खाना खाकर थोड़ी देर विश्राम करते और फिर दोबारा पूरी ऊर्जा के साथ कार्य में जुट जाते।
वर्तमान में उनका हृदय केवल 20 प्रतिशत ही कार्य कर रहा
उनकी यह कार्यशैली ग्रामीणों के बीच भी चर्चा का विषय बनी रही। उनकी कहानी को और विशेष बनाती है उनकी स्वास्थ्य स्थिति। वर्ष 2011 में उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी है और वर्तमान में उनका हृदय केवल 20 प्रतिशत ही कार्य कर रहा है।
हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक की दवाइयों पर खर्च होने के बावजूद उन्होंने कभी बीमारी को अपनी जिम्मेदारियों के आड़े नहीं आने दिया।
यह भी पढ़ें- MP में जनगणना टीम पर हमला, ड्यूटी पर तैनात कोटवार को किया लहूलुहान, कुल्हाड़ी और लाठियों से पीटा; Video वायरल
खेती-किसानी के कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं
भारत सिंह सोलंकी का मानना है कि कार्य करते रहेंगे तो ही स्वस्थ रहेंगे। बीमारी को पालकर बैठना, उसे और बढ़ाना है। यही सकारात्मक सोच उन्हें निरंतर ऊर्जा देती है। शासकीय दायित्वों के साथ-साथ वे खेती-किसानी के कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं।
उनका विश्वास है कि सक्रिय जीवनशैली ही अच्छे स्वास्थ्य का सबसे बड़ा आधार है। गंभीर बीमारी के बावजूद उनका यह समर्पण, अनुशासन और कर्तव्यभाव पूरे शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा बन गया है।