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एमपी में मजदूर के घर आया 11 लाख का बिजली बिल, विभाग के कारनामे से बैगा परिवार के उड़े होश

मंडला के एक बैगा आदिवासी मजदूर परिवार को 11 लाख 44 हजार 680 रुपये का बिजली बिल जारी कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद विभाग ने जांच कर इसे तकनीकी त्...और पढ़ें

By Shahank ChoubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 07:48:20 PM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 07:48:20 PM (IST)
एमपी में मजदूर के घर आया 11 लाख का बिजली बिल, विभाग के कारनामे से बैगा परिवार के उड़े होश
एमपी में मजदूर के घर आया 11 लाख का बिजली बिल

HighLights

  1. बैगा आदिवासी मजदूर को बिजली विभाग ने थमाया 11.44 लाख रुपये का बिल
  2. 100-200 रुपये मासिक बिल वाले गरीब परिवार के उड़े होश, सदमे में परिजन
  3. मामला तूल पकड़ने पर तकनीकी खामी बताकर विभाग ने बिल में किया सुधार

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंडला। बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के एक बैगा आदिवासी मजदूर परिवार को 11 लाख 44 हजार 680 रुपये का बिजली बिल जारी कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद विभाग ने जांच कर इसे तकनीकी त्रुटि बताया और बिल में सुधार कर दिया। हालांकि, इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत झिरिया के ग्राम डूंडा निवासी रत्तेसिंह कन्हरिया बैगा आदिवासी समुदाय से हैं और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकान में रहता है। सामान्यतः उनके घर का मासिक बिजली बिल 100 से 200 रुपये के बीच आता रहा है।


मीटर खराब होने की शिकायत पर नहीं हुई सुनवाई, उल्टा दर्ज कर लिया केस

बताया गया कि करीब चार माह पहले उनके घर का बिजली मीटर खराब हो गया था। इसकी शिकायत रत्तेसिंह ने बिजली विभाग के टोल-फ्री नंबर 1912 पर दर्ज कराई थी, लेकिन न तो मीटर बदला गया और न ही समस्या का समाधान किया गया। इसी दौरान विभाग ने उनके खिलाफ बिजली चोरी का प्रकरण भी दर्ज कर लिया।

परिवार उस समय हैरान रह गया, जब रत्तेसिंह के मोबाइल पर 11 लाख 44 हजार 680 रुपये का बिजली बिल पहुंचा। मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले इस परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि का बिल किसी बड़े झटके से कम नहीं था। बिल देखने के बाद पूरा परिवार चिंता और भय में डूब गया।

मामला बढ़ने पर विभाग ने दी सफाई, 11 लाख का बिल घटकर हुआ 10 हजार

मामला सार्वजनिक होने के बाद बिजली विभाग ने जांच कराई। मंडला विद्युत वितरण कंपनी के कार्यपालन अभियंता अजीत चौहान ने बताया कि बिल तकनीकी त्रुटि के कारण गलत जारी हुआ था। विभाग के अनुसार, बिजली चोरी के प्रकरण में पेनाल्टी सहित वास्तविक देय राशि 10 हजार 814 रुपये है, जिसे संशोधित कर दिया गया है।

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हालांकि विभाग ने बिल में सुधार कर दिया है, लेकिन यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। आखिर एक गरीब आदिवासी परिवार के नाम लाखों रुपये का बिजली बिल कैसे जारी हो गया? शिकायत के बावजूद महीनों तक खराब मीटर क्यों नहीं बदला गया? क्या केवल तकनीकी त्रुटि बताकर इस तरह की चूक की जिम्मेदारी से बचा जा सकता है?