मुरैना के जंगल में तेंदुए का आतंक, चरवाहे को नोचकर किया लहूलुहान; फिर 4 घंटे तक मंदिर में जमाया डेरा
Morena Leopard Attack: कूनो में चीते आने के बाद वहां से खदेड़े गए दर्जनों तेंदुआ पहाड़गढ़ से लेकर धोविनी, गसवानी तक के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। यह...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 04 Aug 2026 12:11:14 PM (IST)Updated Date: Tue, 04 Aug 2026 12:11:51 PM (IST)
लहूलुहान चरवाह केशव गुर्जर। नईदुनियाHighLights
- पहाड़गढ़ के ईश्वरा महादेव जंगल में हमला
- लहूलुहान चरवाहे केशव गुर्जर की हालत गंभीर
- घायल को मंदिर लाए तो पीछे-पीछे आया तेंदुआ
नईदुनिया न्यूज, मुरैना। पहाड़गढ़ के ईश्वरा महादेव जंगल में एक तेंदुआ हमलावर हो उठा। तेंदुआ ने सबसे पहले खिरकाई पर मवेशियों की रखवाली कर रहे चरवाहे पर हमला कर मरणासन्न कर दिया, फिर ईश्वरा महादेव मंदिर पर घंटों बैठा रहा। इस कारण मंदिर के पुजारी व घायल चार घंटे तक एक हॉल में बंद रहे।
कूनो से आए तेंदुओं से बढ़ा इलाकों में खतरा
गौरतलब है, कि कूनो में चीते आने के बाद वहां से खदेड़े गए दर्जनों तेंदुआ पहाड़गढ़ से लेकर धोविनी, गसवानी तक के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। यह तेंदुआ कईयों बार ग्रामीण व चरवाहों पर हमला कर चुके हैं। इन दिनों पूरा जंगल हरा है और बरसात के इस सीजन में ग्रामीण अपनी मवेशियों को लेकर जंगलों में निवास करने लगते हैं। मवेशियों के लिए बनाए गए बाड़े को ग्रामीण खिरकाई बोलते हैं, जहां मवेशियों के साथ कुछ ग्रामीण रखवाली व चराने के लिए रहते हैं। ईश्वरा महादेव मंदिर से एक किलोमीटर दूर स्वाही की टेक गांव के ग्रामीणों की खिरकाई है, जिस पर सोमवार की देर रात 11 बजे तेंदुआ ने हमला कर दिया।
केशव को लहुलूहान कर तेंदुआ चला गया
तेंदुए ने खिरकाई पर मौजूद स्हायी की टेक निवासी 53 वर्षीय केशव पुत्र शंकर गुर्जर पर हमला किया। तेंदुए के हमले में केशव के चेहरे, गर्दन, पीठ, हाथ, सीना आदि जगहों पर गहरे घाव बन गए। खिरकाई से बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर मंदिर पर मौजूद साधू और मंदिर के ऊपर दुकानों के पास विश्राम कर रहे पदयात्री खिरकाई पर पहुंचे, वहा लहुलूहान केशव मिला, तब तक तेंदुआ वहां से चला गया। सूचना के बाद वन विभाग और पुलिस की टीमें मंदिर के आसपास सर्चिंग कर तेंदुए का पता लगा रही हैं। कुछ लोगों ने इसे बाघ भी बताया है।
तेंदुए के हमले के बाद तैनात वन विभाग और पुलिस की टीमें। नईदुनिया
घायल केशव को लाए तो दहाड़ते हुए पीछे आ गया तेंदुआ
- रात साढ़े 11 बजे के करीब घायल चरवाहे को लोग मंदिर पर लेकर आ गए। कुछ ही मिनटों में वहां तेंदुआ भी दहाड़ते हुए आ गया। रात 12 बजे से तड़के चार बजे तक तेंदुआ मंदिर परिसर और उसके आसपास टहलता रहा।
इस दौरान पुजारी या अन्य लोग टार्च का उजाला कर उसकी ओर देखते तो तेंदुआ दहाड़ने लगता। खूंखार तेंदुआ के डर से पुजारी सहित करीब एक दर्जन लोगों ने खुद को एक हाल में बंद कर दिया, इसी में घायल चरवाहा केशव कराहता रहा।
मंदिर पर मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से मदद को फोन भी नहीं लग सके। सुबह चार बजे तेंदुआ चला गया तब पुलिस को खबर की गई, कुछ ही देर में पहाड़गढ़ थाने की टीम पहुंची। तब घायल को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक है।
चार घंटे से ज्यादा मंदिर में मौजूद रहे तेंदुआ ने वह फर्श फाड़ दिया, जिसे चार दिन पहले पहाड़गढ़ थाना प्रभारी ने मंदिर परिसर में बिछवाया था।