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रेत माफिया पर अंकुश लगाने के लिए मप्र, उप्र व राजस्थान मिलकर आधुनिक तकनीकों से करेंगे निगरानी, साझा करेंगे महत्वपूर्ण जानकारी

चंबल नदी से होने वाले रेत के अवैध उत्खनन पर स्थायी अंकुश कैसे लगे, इस पर मंथन करने के लिए मंगलवार को मुरैना में अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स समिति ...और पढ़ें

By Hariom GaurEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 08:07:19 PM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 08:12:41 PM (IST)
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रेत माफिया पर अंकुश लगाने के लिए मप्र, उप्र व राजस्थान मिलकर आधुनिक तकनीकों से करेंगे निगरानी, साझा करेंगे महत्वपूर्ण जानकारी
मंगलवार को मुरैना में अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स समिति की बैठक हुई। प्रतीकात्मक फोटो एआई से बनाई गई है।

HighLights

  1. अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स समिति की बैठक हुई
  2. राज्यों के बीच रियल टाइम डाटा शेयर करने पर सहमति
  3. एक समान प्रारूप एवं प्रक्रियाएं विकसित की जाएंगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। चंबल नदी से होने वाले रेत के अवैध उत्खनन पर स्थायी अंकुश कैसे लगे, इस पर मंथन करने के लिए मंगलवार को मुरैना में अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स समिति की बैठक हुई। देवरी घड़ियाल सेंटर पर हुई बैठक में मुरैना, उप्र के आगरा व राजस्थान के धौलपुर के वरिष्ठ अफसर शामिल हुए।

इस बैठक में इंटरनेट, कैमरे, ड्रोन, गूगल मैप, जीपीएस आदि आधुनिक तकनीकों से चंबल के घाटों की निगरानी व रेत माफिया पर कार्रवाई पर सहमति बनी।

राज्यों के बीच रियल टाइम डाटा होगा शेयर

बैठक में सर्विलांस सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए घाटों, पुलों एवं संवेदनशील मार्गों पर सीसीटीवी एवं ड्रोन कैमरे स्थापित करने, राज्यों के बीच रियल टाइम डाटा शेयरिंग व्यवस्था विकसित करने तथा संयुक्त नियंत्रण कक्षों को सुदृढ़ करने पर सहमति बनी।


चेकिंग प्वाइंट्स पर डिजिटल रिकॉर्ड संधारित करने तथा बिना पंजीयन वाले वाहनों एवं उनके संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा नाइट विजन कैमरे, वाई-फाई आधारित निगरानी प्रणाली, पीए सिस्टम एवं अन्य आधुनिक तकनीकी संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।

वैज्ञानिक मैपिंग कर निगरानी व्यवस्था और अधिक होगी मजबूत

घाटों, चेकपोस्टों एवं संवेदनशील क्षेत्रों की वैज्ञानिक मैपिंग कर निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर एकराय बनी। बैठक में बिना पंजीयन वाले वाहनों के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाने, सभी वैध खनिज परिवहन वाहनों में जीपीएस प्रणाली एवं हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने, सीमा क्षेत्रों में संयुक्त गश्त बढ़ाने, संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति करने तथा आपराधिक रिकार्ड एवं जब्त वाहनों का डाटा साझा करने पर सहमति बनी।

एक समान प्रारूप एवं प्रक्रियाएं विकसित की जाएंगी

इसके साथ ही अवैध खनन में संलिप्त वाहनों की जब्ती के बाद उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा अंतरराज्यीय स्तर पर समन्वित प्रवर्तन व्यवस्था विकसित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अवैध खनन से संबंधित जब्ती, गिरफ्तारी, तलाशी एवं अन्य प्रवर्तन कार्यवाहियों के लिए एक समान प्रारूप एवं प्रक्रियाएं विकसित की जाएंगी, जिससे विभिन्न राज्यों के बीच डाटा साझाकरण एवं रिकॉर्ड संधारण में सुविधा हो सके।

प्रत्येक तीन माह के अंतराल पर होगी बैठक

अंतरराज्यीय माइनिंग टास्क फोर्स की नियमित बैठकें प्रत्येक तीन माह के अंतराल पर आयोजित की जाएंगी तथा संयुक्त कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। बैठक में चंबल संभाग आयुक्त सुरेश कुमार, डीआईजी सुनील जैन, सीसीएफ ग्वालियर लवित भारती, मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, कलेक्टर धौलपुर श्रीनिधि बीटी, अपर कलेक्टर आगरा संदीप कुमार वर्मा, मुरैना एसपी धर्मराज मीणा, धौलपुर एसपी विकास सांगवान, डीएफओ मुरैना हरिश्चन्द्र बघेल, डीएफओ धौलपुर दीपक कुमार मीणा आदि अधिकारी शामिल हुए।

यह भी पढ़ें- मुरैना के बाद श्योपुर में रेत माफिया सक्रिय, 150 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉली रोजाना हो रहे अवैध परिवहन में शामिल

क्या बोले अफसर

संभाग आयुक्त सुरेश कुमारः सभी जिलों को अपने-अपने घाटों, चेकपोस्टों, तैनात अमले, निगरानी संसाधनों एवं नदी किनारे स्थित ग्रामों का अद्यतन विवरण साझा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी जिले घाटों की मैपिंग, संवेदनशील स्थलों की सूची, चेकपोस्टों की स्थिति, नदी तटीय ग्रामों तथा तैनात अमले की जानकारी नियमित रूप से साझा करें, जिससे संयुक्त कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सके।

डीआइजी सुनील जैनः अवैध रेत उत्खनन की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय रणनीति अपनाना आवश्यक है। इसके तहत प्रथम स्तर पर घाटों एवं खनन स्थलों पर निगरानी एवं कार्रवाई, द्वितीय स्तर पर परिवहन मार्गों एवं वाहनों की सघन जांच तथा तृतीय स्तर पर उन गंतव्य स्थलों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी जहां अवैध रूप से उत्खनित रेत का भंडारण अथवा उपयोग किया जाता है। बिना अंतरराज्यीय स्तर पर डाटा साझाकरण की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ः अवैध खनन की रोकथाम के लिए संबंधित जिलों एवं राज्यों के बीच सतत समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों, कंट्रोल रूम तथा सर्विलांस सिस्टम के अधिकतम उपयोग पर बल देते हुए कहा कि संदिग्ध वाहनों पर अंतरराज्यीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी एसओपी तैयार की जानी चाहिए।

एसपी धर्मराज मीणाः अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाइयों की जानकारी राज्यों एवं जिलों के बीच साझा की जानी चाहिए। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त गश्त, सीसीटीवी निगरानी, जब्त एवं अपंजीकृत वाहनों का डाटा साझा करने तथा स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

डीएफओ हरीशचंद्र बघेलः घड़ियाल सेंक्चुरी की नेस्टिंग साइटों (जहां कछुए-घड़ियाल अंडे देते हैं) एवं संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए फेंसिंग, कैमरा नेटवर्क एवं नाइट विजन उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।