• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • राजगढ़

सारंगपुर में सरपंच का 'पारिवारिक' विकास: खुद के खेत तक बनाई सड़क, घर के आगे ठेल टंकी; देवर की जमीन पर खुदवा दिया सरकारी कुआं

सारंगपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बारोल में विकास कार्यों को लेकर की गई शिकायत की जांच पूरी हो गई है। कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन के बाद जनपद पंचायत ...और पढ़ें

By Rajesh SharmaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sat, 20 Jun 2026 04:29:05 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2026 04:36:05 PM (IST)
  • Join करें
सारंगपुर में सरपंच का 'पारिवारिक' विकास: खुद के खेत तक बनाई सड़क, घर के आगे ठेल टंकी; देवर की जमीन पर खुदवा दिया सरकारी कुआं
सरपंच का कारनामा...खुद के खेत तक ग्रेवल सड़क, घर पर ठेल टंकी बनाई, देवर के खेत पर खुदवा दिया सरकारी कुआं।

HighLights

  1. सारंगपुर के बारोल गांव का अजब-गजब कारनामा, सरपंच ने किया अपना विकास
  2. जांच में सही पाए गए भ्रष्टाचार के आरोप; जिला पंचायत को भेजी गई रिपोर्ट
  3. सरकारी खजाने से चमका दी खुद की और रिश्तेदारों की किस्मत

नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़ (सारंगपुर)। कहते हैं "सबका साथ, सबका विकास", लेकिन राजगढ़ जिले के बारोल गांव की सरपंच साहिबा ने इस नारे को थोड़ा और 'पर्सनल' कर लिया। उन्होंने नारा बदला और कर दिया- "अपना साथ, अपने परिवार का विकास।

बारोल पंचायत में पिछले 4 सालों में जो विकास कार्य हुए, उन्हें देखकर कोई भी कह उठेगा कि सरकार का पैसा जनता के लिए नहीं, बल्कि सरपंच सरपंच कैलाश बाई और उनके रिश्तेदारों की सुख-सुविधाओं के लिए आया था। जनता जिसे 'भ्रष्टाचार' कह रही है, उसे ग्राम पंचायत ने 'घरेलू सुख' समझकर फाइलों में ठिकाने लगा दिया। हालांकि, अब इस 'घरेलू विकास मॉडल' पर जनपद सीईओ ने जांच के बाद हंटर चला दिया है।


जानिए सरपंच साहिबा के 4 अनोखे कारनामे

गांव के ही कमल सिंह ने जब इस 'पारिवारिक पंचायत' के खिलाफ कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया और जनपद सीईओ हेमेंद्र गोविल ने जांच कराई, तो जो सच सामने आया वो हैरान करने वाला है:

1. देवर के खेत में 'सरकारी कुआं': आरोप है कि गांव के प्यासे कंठों के लिए जो सरकारी कुआं खोदा जाना था, उसे सरपंच कैलाश बाई ने अपने चचेरे देवर मदनसिंह के खेत के पास खुदवा दिया। चर्चा तो यह भी है कि पहले से बने एक निजी कुएं को ही सरकारी बताकर सरकारी राशि डकार ली गई।

2. खुद के खेतों तक चमचमाती सड़कें: पंचायत निधि से दो ग्रेवल (मुरम) सड़कें मंजूर हुईं। आम जनता सोचती रह गई कि उनके मोहल्ले की सड़क कब बनेगी, लेकिन रिकॉर्ड देखा तो एक सड़क सरपंच के पति बापूसिंह के खेत तक जा पहुंची और दूसरी स्वयं सरपंच कैलाश बाई के खेत का रास्ता नापने लगी।

3. घर के बाहर 'ठेल टंकी': पानी की किल्लत दूर करने के लिए बनने वाली ठेल टंकी का लोकेशन भी बड़ा कमाल का चुना गया। एक टंकी सीधे सरपंच के निजी बंगले के पास खड़ी कर दी गई और दूसरी उनके चचेरे देवर के घर के बाहर।

4. खुद की सिंचाई के लिए चेकडैम: नाले पर सरकारी चेकडैम इसलिए स्वीकृत कराया गया ताकि उसका पूरा पानी सीधे सरपंच की निजी कृषि भूमि को सींच सके। इसके अलावा घर के आसपास कंक्रीट सड़क और सामुदायिक भवन बनाने में भी पूरा 'होम सिकनेस' (घर का मोह) दिखाया गया।

ये हैं वो 8 बिंदु, जिन्होंने खोल दी 'विकास' की पोल

शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ जो 8 मुख्य आरोप लगाए हैं, वे सीधे तौर पर राजकोष की चपत की गवाही देते हैं।

1. सरकारी कुएं के निर्माण में भारी हेरफेर और अपनों को लाभ।

2. केवल निजी खेतों को जोड़ने के लिए ग्रेवल सड़कों का निर्माण।

3. ठेल टंकी निर्माण में केवल परिवार को फायदा पहुंचाना।

4. व्यापक जनहित के बजाय केवल खुद की जमीन देखकर चेकडैम का स्थान चुनना।

5. सरपंच के घर के आसपास ही कंक्रीट सड़क का जाल बिछाना।

6. सामुदायिक भवन के चयन में मनमानी और आपत्ति।

7. 15वें वित्त आयोग की राशि का जमकर दुरुपयोग।

8. काम किसी और ने किया, लेकिन बिल परिवार के ही सदस्य के नाम लगाकर भुगतान निकाला।

यह भी पढ़ें- MP में मनरेगा का महाघोटाला: सरकारी एप का 'क्लोन' बनाकर दर्ज की फर्जी हाजिरी; ₹200 करोड़ के गबन की आशंका, CBI जांच की मांग

जिम्मेदारों ने क्या कहा?

पंचायत के सचिव बाबूलाल गुर्जर अभी भी अपनी सरपंच के बचाव में ढाल बने खड़े हैं और कह रहे हैं कि "मेरे अनुसार शिकायतें सही नहीं हैं, सब जांच रिपोर्ट से साफ होगा।

शिकायत में कई बिंदु शामिल थे, इसलिए जांच में कुछ समय लगा। जांच पूरी हो चुकी है। शिकायत के एक-दो बिंदु सही पाए गए हैं। कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन जिला पंचायत को भेज दिया गया है। धारा-92 के तहत आगे की कार्रवाई जिला पंचायत स्तर से होगी।- हेमेंद्र गोविल, सीईओ, जनपद पंचायत, सारंगपुर।