
नवदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। दबंग जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। शिकायत करने थाने पहुंचा तो थानेदार ने थाने से भगाया, तहसीलदार ने तहसील से यह कहते हुए भगाया कि चले जाओ नहीं तो तुम्हारे खिलाफ ही केस बनवा दूंगा। जब सुनवाई नहीं हुई तो गले में व्यथा की तख्ती टांगकर हाथ में घंटी लेकर बजाते हुए 55 वर्षीय बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री से मिलने भोपाल के लिए पैदल कूच कर दिया।
जब यह भनक प्रशासन को लगी तो खिलचीपुर से बुजुर्ग को पकड़ा व गाड़ी में बैठाया। माचलपुर क्षेत्र के खेड़ी गांव के रहने वाले 55 वर्षीय देवीसिंह की जब सुनवाई नहीं हुई तो सोमवार को उन्होंने अपने गांव से भोपाल के लिए पैदल रूख कर लिया। सुबह 5 बजे घर से गले में समस्या एक तख्ती टांगी और हाथ में घंटी लेकर बजाते हुए भोपाल के लिए चल पढ़ा। करीब 40 किमी की पैदल यात्रा करने के बाद वह खिलचीपुर पहुंचा।
बुजुर्ग ने बताया कि एक माह हो गया। थाने में जाओ तो थानेदार बोलते हैं कि तहसीलदार से लिखा कर लाओ। तहसीलदार के पास जाओ, तो तहसीलदार बोलते हैं के चुपचाप चले जाओ नहीं तो तुम्हारे खिलाफ केस बनवा दूंगा। साहब मैं परेशान हो गया।
मेरी 2 बीघा 4 बिस्वा जमीन पर जबरन ट्रैक्टर निकाल दिया सामने वाला ने। बड़ी लाइन के पाइप तोड़ दिए। छगनसिंह, राधा, संजू, पोलखेड़ा के। 20-25 लोगों को लेकर हमको मारने आए थे।हम तो मैं, लडका, भाई हम तीनों जान बचाकर भागे। मेरे को जान से मारने की धमकी दी।
देवी सिंह का कहना है कि उसके नाम 2 बीघा 4 बिस्वा पुश्तैनी जमीन है। जमीन को लेकर विवाद न्यायालय तक पहुंचा था और फैसला भी उसके पक्ष में आया। दस्तावेज और रिकॉर्ड उसके नाम हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। शिकायत लेकर माचलपुर तहसील व माचलपुर थाने जा रहा हूं तो सुनवाई करने की बजाए भगा रहे हैं व केस में फंसाने की धमकी दे रहे हैं।
राजगढ जिले में अधिकारियों ने जब उसकी समस्या की सुनवाई नहीं की तो वह परेशान हो गया।ऐसे में उन्हें सिर्फ मुख्यमंत्री से सुनवाई की उम्मीद बची। इसी निराशा के बीच सोमवार सुबह करीब 5 बजे वह अपने भाई बने सिंह के साथ गांव से भोपाल के लिए पैदल रवाना हो गया।
उसके गले में टंगी तख्ती पर लिखा था— 'अधिकारी सुनते नहीं साहब, पैदल भोपाल जा रहा हूं, मुख्यमंत्री तो सुनेंगे। मेरी जमीन हड़पना चाहते हैं। राजगढ़ जाकर थक गया, अब भोपाल जा रहा हूं।' रास्ते भर किसान हाथ में घंटी बजाता रहा। जो भी उसे देखता, उसकी नजर सबसे पहले तख्ती पर लिखे शब्दों पर जाती। राहगीर रुककर उससे बातचीत करते रहे और उसकी पूरी कहानी सुनते रहे।
हम जमीन का केस न्यायालय से जीत गए, लेकिन कुछ दबंग कब्जा करना चाह रहे।हमें परेशान कर रहे।हमारे भाई को माचलपुर में तहसीलदार व माचलपुर के थाना प्रभारी ने भगा दिया। कोई सुनने को तैयार नहीं। इसलिए वह भोपाल पैदल जा रहे थे। खिलचीपुर से कोई पटवारी व गिरदावर वापस लाए हैं। - बनेसिंह, पीड़ित का भाई।