
सुनील चोपड़ा, नईदुनिया, आलोट (रतलाम)। सड़क विकास के बड़े दावों पर जावरा-सीतामऊ-असावती मार्ग की स्थिति इन सवाल खड़े कर रही है।
लगभग 59 किलोमीटर लंबी और 89 करोड़ की लागत से निर्मित सीसी रोड एक दशक पहले बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन इस मार्ग पर असावती, रोला और भड़का गांव के पास प्रस्तावित तीन बड़ी पुलियाएं आज तक अधूरी हैं। इसके कारण करीब 30 गांवों के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में ब्रिज कार्पोरेशन ने तीनों पुलियाओं के निर्माण के लिए 24 करोड़ का टेंडर जारी किया था, लेकिन ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया। बाद में उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। अब संशोधित लागत के साथ 31 करोड़ का नया टेंडर जारी कर निर्माण कार्य भक्ति कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया। हालांकि पुलियाओं के एप्रोच रोड और बढ़ी हुई लागत से जुड़े संशोधित प्रस्ताव को अब तक शासन की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इससे कार्य फिर से ठप पड़ा है।
जिला कांग्रेस महामंत्री बलवंतसिंह गोंदीशंकर का कहना है कि सड़क निर्माण के दस वर्ष बाद भी पुलियाएं अधूरी हैं। इससे हर वर्षाकाल में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार करना पड़ते हैं। उन्होंने देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
माधोपुर निवासी राजू डाबी ने बताया कि यह मार्ग राजस्थान सहित तीन जिलों को जोड़ता है, लेकिन पुल नहीं बनने से लोगों को 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। ताल निवासी बंसीलाल पोरवाल ने सवाल उठाया कि जब सड़क परियोजना स्वीकृत हुई थी, तब पुलों की स्वीकृति साथ में क्यों नहीं ली गई।
ब्रिज कार्पोरेशन के एसडीओ रघुनाथ सूर्यवंशी ने बताया कि एप्रोच रोड और संशोधित राशि की प्रशासकीय स्वीकृति शासन स्तर पर लंबित है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराया जाएगा।