
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। नौ वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म के प्रकरण में विशेष न्यायालय (पाक्सो एक्ट) के न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा ने अभियुक्त राजेंद्र सिंह राजपूत को दोषी पाते हुए दोहरा आजीवन कारावास और 27 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही न्यायालय ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे दो लाख रुपये की प्रतिकर राशि प्रदान करने का भी आदेश दिया है।
विशेष लोक अभियोजक गौतम परमार ने बताया कि घटना 11 जून 2023 की रात को हुई थी, जब नामली थाना क्षेत्र के एक गांव में बालिका अपनी नानी के साथ घर के बाहर सो रही थी। रात करीब दो बजे राजेंद्र सिंह उसे उठाकर घर के पीछे एक सुनसान खेत में ले गया।
वहां उसने बालिका के साथ जघन्य कृत्य किया और विरोध करने पर मासूम के साथ मारपीट कर उसे जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद बदहवास स्थिति में घर पहुंची बच्ची ने नानी को आपबीती सुनाई, जिसके बाद स्वजन ने राजेंद्र को मौके से भागते हुए भी देखा।
दरिंदगी का असर इतना गहरा था कि मासूम को रतलाम अस्पताल में पांच दिनों तक भर्ती रहना पड़ा। न्यायालय ने अपने फैसले में समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कड़ी टिप्पणी की है।
न्यायाधीश ने उल्लेख किया कि जिस देश में 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं को देवी मानकर पूजा जाता है, वहां अपनी बेटी की उम्र की बच्ची के साथ ऐसा कृत्य करना समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोषी राजेंद्र सिंह का अपराध किसी भी प्रकार की दया के योग्य नहीं है, इसलिए उसे कठोरतम सजा दी जा रही है।
मामले को शासन द्वारा जघन्य एवं सनसनीखेज श्रेणी में रखा गया था, जिसकी मानिटरिंग वरिष्ठ स्तर पर की जा रही थी। मौखिक, दस्तावेजी व मेडिकल साक्ष्यों के जरिए अपराध को प्रमाणित किया गया। पुलिस विवेचना के दौरान महिला थाना प्रभारी नीलम चोंगड़ द्वारा जुटाए गए साक्ष्य अहम रहे।