
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। अवैध उत्खनन के नाम पर डंपर जब्ती की कार्रवाई के विरोध से शुरू हुए विवाद ने मंगलवार को बड़ा रूप ले लिया, जब करणी सेना परिवार के कार्यकर्ता 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव के लिए निकले। शहर पहुंचने से पहले ही डोसी गांव स्थित महू-नीमच फोरलेन पर पुलिस ने करणी सेना परिवार प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर व उनके समर्थकों को रोक दिया। कलेक्टर के मौके पर नहीं आने से अड़े प्रदर्शनकारी रात में टेंट-बिस्तर लगाकर डटे रहे। प्रदर्शन अब बुधवार को भी जारी रहने की संभावना है।

कलेक्ट्रेट घेराव का समय दोपहर 12:30 बजे का था, लेकिन जीवन सिंह शेरपुर करीब 1:30 बजे डोसीगांव पहुंचे। पुलिस ने सुबह 10 बजे ही शहर के सभी एंट्री प्वॉइंट सील कर भारी बल तैनात कर दिया। एसपी अमित कुमार व एएसपी विवेक कुमार लगातार क्षेत्र का भ्रमण करते रहे। पुलिस ने जावरा, आलोट, सैलाना समेत कई स्थानों पर समर्थकों के वाहनों को रोककर चेकिंग भी की। आंदोलन के लिए बसें भरकर कार्यकर्ता रतलाम की ओर पहुंचे।

मौके पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। करीब 6 घंटे से अधिक समय तक चले धरने में अधिकारी एक-एक कर समझाइश देने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी कलेक्टर मिशा सिंह को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। जीवनसिंह शेरपुर ने कहा कि वे जनता के हित में कलेक्टर से सीधे चर्चा करना चाहते हैं। यदि प्रशासन उन्हें आतंकवादी मानता है तो स्पष्ट बताए।

कलेक्टर के नहीं आने पर रात में कार्यकर्ताओं ने बिस्तर आदि मंगवाकर रोड पर ही डेरा डाल दिया। मौके पर ही पूड़ी-सब्जी बनाकर सभी ने खाना खाया और टेंट व बिस्तर डाल दिए। पुलिस व प्रशासनिक अमला भी सड़क पर ही जगह तलाशकर आराम करता रहा।रात करीब 12 बजे तक समझाइश का दौर चलता रहा, लेकिन बात नहीं बनी।
जावरा शहर की महिलाएं भी भूमि के पट्टे व आवास योजना का लाभ नहीं मिलने से नाराज होकर प्रदर्शन में पहुंचीं। इनमें से कई महिलाएं रोजे पर थी। इसी दौरान 25 वर्षीय रुखसार पत्नी नाहरू निवासी संजय कालोनी बेहोश हो गई, जिसे वाहन से उपचार के लिए ले जाया गया। महिलाओं ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश भी की, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। बढ़ती गर्मी को देखते हुए मौके पर पानी के कैंपर मंगवाए गए, जबकि एहतियात के तौर पर दो फायर लारियां भी तैनात रहीं। करीब 4 बजे महिलाएं पैदल कलेक्ट्रेट की ओर निकल गई, जिन्हें आगे वाहन से कलेक्ट्रेट पहुंचाया।
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जीवनसिंह शेरपुर ने आरोप लगाया कि गांवों में अवैध शराब जैसे मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वे जनता की समस्याएं उठाने आए हैं, लेकिन उन्हें शहर में प्रवेश तक नहीं दिया जा रहा। उल्लेखनीय है कि सात दिन पहले जावरा ब्लाक में झालवा-कलालिया रोड निर्माण में लगे दो डंपरों को खनिज विभाग ने अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया था। ये डंपर ठेकेदार आयुष शर्मा के बताए जा रहे हैं, जिन्हें जीवन सिंह शेरपुर का समर्थक माना जाता है।
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इसी कार्रवाई के विरोध में पहले रिंगनोद थाने में धरना दिया गया था, जिसके बाद कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की गई। प्रदर्शन के माध्यम से 11 प्रमुख मांगों में अवैध उत्खनन के नाम पर कार्रवाई रोकने, पिपलिया जोधा में देह व्यापार पर रोक, आमनेर बालिका अपहरण प्रकरण में त्वरित न्याय, चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण, बोरवानी के अवैध ईंट भट्ठों को हटाने, किसानों की कर्ज अदायगी की समय सीमा बढ़ाने, गेहूं खरीदी की समस्याओं का समाधान और जावरा की आविका सिटी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

प्रदर्शन के चलते सुबह से ही कलेक्ट्रेट के बाहर व आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनाती के साथ ही बेरीकेडिंग कर दी गई थी। मंगलवार को जनसुनवाई होने से कई आवेदकों को भी अंदर जाने में मशक्कत करना पड़ी। पुलिस ने कलेक्ट्रेट के अन्य विभागों में आने वालों को अंदर नहीं जाने दिया। जरूरी काम लेकर आए लोग इस वजह से परेशान होते रहे।