प्रेम विवाह किया तो, होगा सामाजिक बहिष्कार, दूध-पंडित तक पर रोक... रतलाम के गांव का फरमान Viral, जांच में जुटा प्रशासन
रतलाम के पंचेवा गांव का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति यह कह रहा है कि प्रेम विवाह करने वाले परिवारों को गांव से पूरी तरह अलग-थलग कर दिय ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 26 Jan 2026 04:22:20 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Jan 2026 04:29:10 AM (IST)
प्रेम विवाह करने वालों के खिलाफ गांव ने जारी किया फरमानHighLights
- प्रेम विवाह के खिलाफ फरमान का वीडियो वायरल
- परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने की चेतावनी
- ठक में गांव के 3 परिवारों का नाम लेकर की घोषणा
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम: जिले के जावरा विकासखंड के ग्राम पंचेवा में प्रेम विवाह करने वालों और उन्हें सहयोग देने वालों के सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्कार का फैसला ग्रामीणों ने किया है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है और एसडीएम सुनील जायसवाल ने जांच के आदेश दिए हैं।
ग्राम में आयोजित चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने प्रस्ताव पारित कर यह घोषणा की कि गांव में भागकर शादी करने या प्रेम विवाह करने वालों और उनके परिजनों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। बहिष्कार के तहत न तो उन्हें किसी सामाजिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा और न ही मजदूरी, दूध जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां तक कि गांव के पंडित, केश शिल्पी (नाई) और अन्य सेवा देने वालों को भी ऐसे परिवारों के यहां जाने से रोका जाएगा।
शरण देने वालों पर भी प्रतिबंध
वायरल वीडियो में गांव का एक व्यक्ति यह कहते हुए दिखाई दे रहा है कि प्रेम विवाह करने वाले परिवारों को गांव से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रेम विवाह करवाने में सहयोग करने वालों या बाहर से आकर विवाह करने वालों को शरण देने वालों पर भी यही प्रतिबंध लागू रहेगा। इसके बाद गांव के ही तीन परिवारों के नाम लेकर उनके सामाजिक बहिष्कार की सार्वजनिक घोषणा कर दी गई।
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संविधान देता है समानता का अधिकार
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं अनुच्छेद 15 किसी भी नागरिक के साथ सामाजिक आधार पर भेदभाव को निषिद्ध करता है। इसके अलावा अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता और सामाजिक बहिष्कार जैसी प्रथाओं को पूर्णतः समाप्त कर उन्हें दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखता है।
कानूनी दृष्टि से किसी भी व्यक्ति या परिवार को समाज से बाहर करने, आजीविका से वंचित करने या मूलभूत सेवाओं पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी अपने कई फैसलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि बालिगों द्वारा अपनी इच्छा से किया गया विवाह संविधान द्वारा संरक्षित व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में आता है।