
नईदुनिया न्यूज,सीतापुर। सीतापुर में मंगलवार को बीच सड़क पर धू-धू कर जली कार ने मऊगंज जिले में आपातकालीन व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। एक ओर सवारों ने कूदकर अपनी जान बचाई, वहीं दूसरी ओर आग की लपटों के सामने आम जनता और प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आया।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या सीतापुर जैसे व्यस्त क्षेत्रों में ऐसी आकस्मिक घटनाओं से निपटने के लिए हमारे पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सड़क पर कार जलती रही और लोग तमाशबीन बने रहे।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह केवल एक वाहन की आग नहीं थी, बल्कि यह प्रशासन की उस सुस्ती का प्रमाण था जो अक्सर हादसों के बाद ही जागती है।
अधिकारी इसे भीषण गर्मी और शॉर्ट सर्किट का नाम देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन क्या सड़कों पर दौड़ते वाहनों की सुरक्षा जांच के लिए कोई ठोस व्यवस्था है?
सीतापुर मार्ग पर बढ़ती वाहनों की संख्या के बावजूद सड़क सुरक्षा के मानकों की अनदेखी की जा रही है। अगर यह आग किसी भीड़भाड़ वाले बाजार में लगती, तो परिणाम कितने भयावह होते, इसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है।
हादसे के बाद घंटों तक सड़क किनारे लोगों का जमावड़ा लगा रहा। स्थानीय युवाओं का कहना है कि प्रशासन केवल टैक्स वसूलने में व्यस्त है, लेकिन जब सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की बात आती है, तो सब कुछ 'भगवान भरोसे' छोड़ दिया जाता है।
जलती कार से निकलते धुएं के गुबार ने मऊगंज की बदहाल व्यवस्था को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। गर्मी बढ़ रही है और ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी बढ़ सकती हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल जांच का आश्वासन न दे, बल्कि सीतापुर और मऊगंज के प्रमुख चौराहों पर अग्निशन और प्राथमिक चिकित्सा के संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
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