• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • सीहोर

जल संकट को लेकर महिलाओं की 'गांधीगिरी': सिर पर खाली बर्तन, हाथों में गुलाब, 43°C की धूप में पैदल पहुंचीं भोपाल

जल संकट को लेकर सीहोर जिला के दर्जनों गांवों की महिलाएं खाली पानी के बर्तन और हाथों में गुलाब के फूल लेकर गांधीगिरी के अंदाज में पैदल रैली निकालते हुए...और पढ़ें

By Akash MathurEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 20 May 2026 03:31:46 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 May 2026 03:35:37 PM (IST)
  • Join करें
जल संकट को लेकर महिलाओं की 'गांधीगिरी': सिर पर खाली बर्तन, हाथों में गुलाब, 43°C की धूप में पैदल पहुंचीं भोपाल
पानी की समस्या को लेकर भोपाल की सड़कों पर प्रदर्शन करते जिले के किसान और महिलाएं। नईदुनिया।

HighLights

  1. सीहोर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की महिलाएं पैदल रैली निकालते हुए भोपाल पहुंचीं
  2. 43 डिग्री में पानी की बूंद-बूंद को तरसती महिलाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला
  3. बोर खनन (नलकूप) और अधूरी पड़ी 'नल-जल योजना' को शुरू करने की उठाई मांग

नईदुनिया प्रतिनिधि, सीहोर। गर्मी की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। सीहोर जिले के दर्जनों गांवों में पानी की भारी किल्लत से परेशान होकर आदिवासी और हरिजन बाहुल्य क्षेत्रों की महिलाओं ने विरोध का एक अनोखा और शांतिपूर्ण रास्ता चुना।

विगत दिवस 43 डिग्री की भीषण गर्मी और चुभती धूप की परवाह किए बिना, सिर पर खाली बर्तन और हाथों में गुलाब के फूल थामे सैकड़ों महिलाएं 'गांधीगिरी' के अंदाज में पैदल मार्च करते हुए राजधानी भोपाल पहुंच गईं।

इस पैदल रैली का नेतृत्व ग्राम पंचायत रामगढ़ के सरपंच अशोक मीणा कर रहे थे। रैली में शामिल महिलाओं और किसानों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि पिछले दो महीनों से वे लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रभारी मंत्री और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आश्वासनों के अलावा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।


नदी के पास बोर खनन और पाइपलाइन की मांग

रामगढ़ पंचायत के अंतर्गत आने वाले कई दूरदराज के मजरों-टोलों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पांगरी जंगल, काला पाठा मोहल्ला, मवड़ला, आदिवासी मोहल्ला और पांगरी जंगल के हरिजन मोहल्ले में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा है।

प्रदर्शनकारी महिलाओं की मांग है कि रामगढ़ स्थित नदी के समीप एक बड़ा बोर खनन (नलकूप) कराया जाए, और वहां से पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक पानी पहुंचाया जाए। साथ ही ठप पड़ी नल-जल योजना के काम में तेजी लाई जाए।

"बजट में हुई 70 फीसदी की कटौती"

आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा खुलासा किया। ग्रामीणों के अनुसार, जब वे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के पास गुहार लगाने पहुंचे, तो अधिकारियों ने अपनी लाचारी जताते हुए कहा कि "इस वर्ष विभाग के बजट में लगभग 70 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है।"

बजट की इसी कमी के कारण जल संकट से जूझ रहे गांवों में नए नलकूपों का खनन कराना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है। इस जानकारी के बाद अब ग्रामीणों ने सीधे वित्त विभाग से मांग की है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का बजट तुरंत बढ़ाया जाए ताकि प्यासे गांवों को राहत मिल सके।

यह भी पढ़ें- बैतूल में जलसंकट : नल सूखे, हैंडपंप बंद... कुएं में उतरने को मजबूर लोग

पुलिस का 'मानवीय चेहरा', ग्रामीणों ने जताया आभार

इस प्रदर्शन के बीच भोपाल पुलिस का एक बेहद सकारात्मक और मानवीय चेहरा भी सामने आया। किसान एमएस मेवाड़ा और अन्य ग्रामीणों ने खुले मन से पुलिस प्रशासन की तारीफ की।

ग्रामीणों ने बताया कि इतनी भीषण गर्मी में पैदल चलकर पहुंचीं महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही ठंडे पानी, चाय और नाश्ते की व्यवस्था की। साथ ही पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों का ज्ञापन पूरी सुरक्षा के साथ संबंधित मंत्रियों और उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया।

आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में सरकार को चेताया है कि यह सिर्फ एक शांतिपूर्ण शुरुआत थी। यदि प्रभावित गांवों में जल्द से जल्द बोरिंग मशीनें नहीं पहुंचीं और पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।