संजय अग्रवाल, नईदुनिया सिवनी: पेंच टाइगर रिजर्व की लंगड़ी बाघिन (टी-20) वर्तमान में देश की सबसे उम्रदराज बाघिन है, जो संरक्षित वन क्षेत्र में विचरण करते हुए जीवित है। लंबे से बड़ा शिकार करने में असमर्थ हो चुकी लंगड़ी बाघिन शारीरिक रूप से दुर्बल व कमजोर हो गई है। इससे पेंच प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है।
लगभग 18 साल उम्र की देश की सबसे उम्रदराज लंगड़ी बाघिन की मैदानी वन अमला लगातार निगरानी कर रहा है। मई 2008 में जन्मी लंगड़ी बाघिन ने साल 2012 से 2021 के बीच चार बार में कुल 11 शावकों को जन्म दिया है, जो सभी वयस्क होने तक बाघिन के साथ रहे।
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लंगड़ी बाघिन, पेंच ( फोटो- इंटरनेट)
वन्यप्राणी विशेषज्ञ मानते हैं कि जंगल की चुनौतियों के बीच कोई भी बाघ अथवा बाघिन की औसत उम्र 10 से 12 साल होती है। 17 साल 7 माह उम्र पूरी होने के बावजूद लंगड़ी बाघिन जंगल में विचरण करते हुए जीवित है, यह पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के आदर्श वातावरण व प्रबंधन के समर्पण को प्रदर्शित करता है।
खास बात यह है शिकार के दौरान कई बार घायल होने पर लंगड़ी बाघिन का पूरे जीवनकाल में छह बार वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा मौके पर ही उपचार कर उसे जंगल में छोड़ा गया। इसके बाद भी चुनौतियों से लड़ते हुए बाघिन उम्र के इस पड़ाव तक पहुंची है।
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बाघिन- कॉलरवाली (फोटो- MP Tourism)
बचा शिकार खाकर जीवित हैं उम्रदराज बाघिन
प्रबंधन के अनुसार 'लंगड़ी' बाघिन ने जंगल में चहलकदमी करते बीते कुछ समय से शिकार करना छोड़ दिया है। वर्तमान में बाघिन अन्य बाघ, तेंदुआ अथवा अन्य वन्यजीवों द्वारा किए गए शिकार को खाकर जीवित है। इसके कारण वह शारीरिक रूप से कमजोर हो गई है। 6 फरवरी की दोपहर बाघिन जंगल में एक जगह बैठी दिखाई दी, जिसमें कोई हरकत नहीं हो रही थी।
मैदानी अमले से इसकी सूचना मिलने पर पेंच टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सक व रेस्क्यू दल मौके पर पहुंचा, जहां खुद उठकर जंगल में चली गई। पेंच पार्क के क्षेत्र संचालक देवा प्रसाद जे ने नईदुनिया को बताया कि चूंकि लंगड़ी बाघिन अपनी औसत आयु से कहीं अधिक उम्र की हो चुकी है। ऐसे में बाघिन की गतिविधियों की प्रबंधन केवल निगरानी कर रहा है।
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सबसे अधिक समय तक जीवित रहने का कीर्तिमान
पेंच टाइगर रिज़र्व की बाघिन टी-20 ‘लंगड़ी’ वर्तमान में लगभग 18 साल उम्र की है, जो न केवल पेंच बल्कि पूरे देश की टाइगर रिज़र्व सीमाओं में रहने वाली सबसे उम्रदराज बाघिन है। लंगड़ी बाघिन पेंच की विश्वविख्यात कॉलरवाली बाघिन की बहन है। 29 शावकों को जन्म देने वाली कालरवाली बाघिन की मौत 17 साल की उम्र में हुई थी, जो लंबे समय तक रिकॉर्ड रहा। अब लंगड़ी बाघिन ने अपनी बहन के जीवित रहने के रिकार्ड को पीछे छोड़ दिया है।
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बाघिन कॉलरवाली (फोटो-इंटरनेट)
पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार बाघिन 17 साल 7 माह की उम्र पूरी कर चुकी है। सामान्य तौर पर बाघों की औसत आयु जंगल में 10 से 20 साल मानी जाती है, ऐसे में इतनी अधिक उम्र तक जीवित रहना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
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लंगड़ाकर चलने के कारण पड़ा यह नाम
डिप्टी डायेक्टर पीयूष गोयल ने बताया कि पेंच टाइगर रिजर्व की बड़ी मादा बाघिन से मई 2008 में जन्मी पीएन 20 लंगड़ी बाघिन को कर्माझिरी पर्यटन जोन में देखा गया है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में बाघिन को इसी क्षेत्र में देखा गया था। सफारी के दौरान एक पर्यटक द्वारा ली गई तस्वीर से पीएन 20 लंगड़ी बाघिन को पहचाना गया।
पेंच की कालरवाली बाघिन लगभग 17 वर्ष जीवित रही थी। पीएन 20 लंगड़ी बाघिन लगभग 17 वर्ष 7 माह की हो चुकी है। इस बाघिन का सामने का पंजा पैर से जुडे होने के कारण यह कुछ लंगड़ा कर चलती है, इस लंगड़ाकर चलने के कारण ये पर्यटकों के मध्य लंगड़ी के नाम से प्रसिद्ध है। अपनी बहन कालरवाली का रिकॉर्ड तोड़कर सबसे अधिक उम्रदराज बाघिन होने का कीर्तिमान लंगड़ी बाघिन ने स्थापित किया है।