
नईदुनिया प्रतिनिधि, सिवनी। शहर के सघन आबादी सुनारी मोहल्ला क्षेत्र में बीते दिनों हुई फायरिंग की सनसनीखेज घटना के पीछे छिपे खूनी षडयंत्र का कोतवाली पुलिस ने राजफाश कर दिया है। पुलिस कंट्रोल रूम में बुधवार को पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी ने प्रेस वार्ता में पूरे घटनाक्रम के पीछे की कहानी को सार्वजनिक करते हुए बताया कि 3 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी हथियाने व आवेदक की हत्या करने का षडयंत्र रचा गया था।
प्रेस वार्ता में एएसपी दीपक मिश्रा, एसडीओपी सचिन परते, थाना प्रभारी सतीश तिवारी सहित पुलिस दल मौजूद रहा। घटना को अंजाम देने भोपाल से पेशेवर शूटर बुलाए गए थे, जिसने सभी को चौंका दिया।
उल्लेखनीय है कि 11-12 जून की रात सुनारी मोहल्ला निवासी शैलेन्द्र चौरसिया के घर को बाइक में सवार होकर पहुंचे शूटरों ने निशाना बनाकर फायर किया था। रात लगभग 2.30 बजे सन्नाटे के बीच चली गोली शटर को भेदते हुए सीधे दुकान के अंदर से घर में उस जगह जा धंसी, जहां प्रार्थी अक्सर सोया करता था। संयोग की बात थी कि घटना की रात वह किसी कारणवश वहां नहीं सोया और उसकी जान बच गई।
सड़क पर पड़े बुलेट के खोखे व शटर पर गोली के निशान से एसडीओपी व थाना प्रभारी की जांच में यह साफ हो गया कि यह हमला सीधे तौर पर जान लेने की नीयत से किया गया था। कोतवाली पुलिस ने जांच में पूरे मामले का भंडाफोड़ कर दो शूटरों सहित तीन आरोपितों को जेल भेज दिया है। जबकि इस वारदात का मास्टरमाइंड अब भी फरार है।
पुलिस अधीक्षक लालचंदानी ने बताया कि विवेचना में प्रकरण में शातिर व फिल्मी तरीके का षडयंत्र सामने आया। दरअसल, छिंदवाड़ा चौक पर स्थित लगभग 3 करोड़ रुपये की एक मूल्यवान प्रॉपर्टी को लेकर आवेदक का अपने परिवार से गहरा विवाद चल रहा है, जिसका प्रकरण कोर्ट में चल रहा है। विवाद से परेशान होकर आवेदक ने प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने का अनुबंध कर लिया था, जिससे इस प्रॉपर्टी के बिकने पर मिलने वाला लाभ आरोपित अमन चौहान व गौरव दीक्षित को मिलता नहीं दिख रहा था।
इसी बीच विवादित प्रॉपर्टी पर कब्जेधारी कृष्णा चौरसिया ने भी आवेदक को जान से मारने की धमकी दी थी। इसी बात का लाभ उठाते हुए दोनों आरोपितों ने योजना बनाई कि यदि वे शैलेन्द्र (सत्येन्द्र) पर जानलेवा हमला करते हैं, तो सीधा शक कृष्णा चौरसिया पर जाएगा और उनके लिए प्रॉपर्टी को कब्जा मुक्त कराने का रास्ता साफ हो जाएगा। अपने इसी खूनी षडयंत्र को पूरा करने गौरव व अमन ने भोपाल से निखिल वाथम व गोलू अहिरवार नाम के दो शातिर शूटरों से संपर्क साधा। अमन चौहान ने स्थानीय स्तर पर शूटरों को बाइक (टीवीएस राइडर) मुहैया कराई।
वारदात वाली रात गोलू बाइक चलाकर मौके पर पहुंचा व निखिल ने अपनी देसी पिस्टल से फायरिंग की। लेकिन अपराधियों की यह चाल कोतवाली पुलिस की पैनी नजरों से बच नहीं सकी। घटना के तुरंत बाद पुलिस टीम ने 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और सबसे पहले भैरोगंज निवासी अमन पुत्र स्व. रमेश चौहान (28) को धर दबोचा।
अमन से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने भोपाल के निशांतपुरा स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से दोनों शूटरों निखिल पुत्र स्व. सुनील वाथम (25) व गोलू पुत्र स्व. अवध नारायण अहिरवार (25) को भी गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों शूटरों का भोपाल में पहले से ही मारपीट व आबकारी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। घटना का मुख्य सूत्रधार व मास्टर माइंड गौरव पुत्र स्व. नरेन्द्र दीक्षित (30) हाउसिंग बोर्ड निवासी पुलिस की धरपकड़ से बचने के लिए फरार हो गया, जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
पुलिस ने आरोपितों से घटना में उपयोग की गई मोटरसाइकिल (एमपी 22 जेडई 2195), एक देसी पिस्टल, एक जिंदा कारतूस तथा एक कीपैड मोबाइल जब्त कर लिया है।
आरोपितों की गिरफ्तारी व इस पूरे सनसनीखेज घटनाक्रम का राजफाश करने में सिवनी एसडीओपी सचिन परते, कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी और उनकी टीम के प्रधान आरक्षक मुकेश गौडाने, सिद्धार्थ दुबे, सतीश इनवाती तथा प्रतीक बघेल सहित अन्य पुलिस कर्मियों का सहयोग रहा।
एसडीओपी सचिन परते ने बताया कि जांच में यह बात भी सामने आई है कि शूटरों को 15-15 हजार रुपये में सौदा तय कर बुलाया गया था, जिसमें से 5 हजार रुपये दिए जा चुके थे और 25 हजार रुपये की रकम मिलना शेष थी। आरोपित विवादित संपत्ति से वर्तमान कब्जाधारी को बेदखल करना चाहते थे। संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य 3 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
आवेदक ने संपत्ति का अनुबंध (सौदा) पहले ही 75 लाख रुपये में कर लिया था। 3 करोड़ रुपये की संपत्ति बिकने पर अमन को 5 प्रतिशत तथा गौरव को लगभग 20 प्रतिशत का कमीशन मिलना था। इस घटना के जरिए कब्जा हटवाकर अधिक मूल्य में संपत्ति बिकने से मिलने वाले कमीशन के लालच को ही घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।
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