मां के कंधों पर बेटे के सपनों का बोझः शहडोल में रोज दिव्यांग बेटे को 10 किमी का सफर तयकर स्कूल पहुंचा रही मां
मां रोज बेटे को अपनी पीठ पर बैठाकर घर से बस स्टैंड तक और फिर बस से उतरकर स्कूल तक पहुंचाती है।
Publish Date: Mon, 07 Sep 2026 04:04:21 PM (IST)Updated Date: Mon, 07 Sep 2026 05:15:15 PM (IST)
शहडोल में पीठ पर लादकर दिव्यांग बेटे को स्कूल पहुंचाती मांHighLights
- दिव्यांग बेटे को पीठ पर लादकर स्कूल पहुंचाती मां
- रोज 10 किमी का सफर तय करती मजबूर मां
- अधिकारियों से कर चुकी इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। मां अपने बच्चे के लिए क्या-क्या नहीं कर सकती, इसकी मार्मिक तस्वीर जिले के झींक बिजुरी गांव से सामने आई है। यहां 12वीं कक्षा में पढ़ने वाला राजकुमार जायसवाल 80 प्रतिशत दिव्यांग है और ठीक से चल-फिर नहीं पाता। स्कूल जाने के लिए उसे अपनी मां फूल कुमारी की पीठ का सहारा लेना पड़ता।
राजकुमार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झींक बिजुरी में पढ़ता है। उसका गांव दरशिला यहां से करीब 10 किलोमीटर दूर है। मां रोज बेटे को अपनी पीठ पर बैठाकर घर से बस स्टैंड तक और फिर बस से उतरकर स्कूल तक पहुंचाती है। आने-जाने में करीब 50 रुपये बस किराया भी खर्च होता है।
झींक बिजुरी जाना पड़ता है स्कूल
घर में मां और बेटे के अलावा कोई नहीं है। फूल कुमारी बताती हैं कि बेटा 10वीं तक गांव के पास के स्कूल में पढ़ता था, लेकिन 11वीं-12वीं के लिए झींक बिजुरी आना पड़ता है। वह चल नहीं सकता, इसलिए रोज उसे कंधे पर लेकर बस स्टैंड और फिर स्कूल तक लाना पड़ता है। दो साल से यही सिलसिला जारी है।
स्कूल के समय तक मां को वहीं रुकना पड़ता है, जिससे मजदूरी का समय भी नहीं मिल पाता और परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। राजकुमार की इच्छा है कि उसे एक इलेक्ट्रिक साइकिल मिल जाए, ताकि वह खुद स्कूल आ-जा सके और मां पर निर्भर न रहे।
राजकुमार और उसकी मां ने मंत्री दिलीप जायसवाल और कलेक्ट्रेट में आवेदन भी दिया था, लेकिन दो महीने से अधिक समय बाद भी मदद नहीं मिली। राजकुमार को अब 11 सितंबर को झींक बिजुरी में आयोजित होने वाले जन विश्वास शिविर से उम्मीद है।
अधिकारियों से मांगी गई सहायता
दरशिला पंचायत सचिव गंगा राम ने कहा, मेरी पंचायत का यह बच्चा है। मां उसे अपनी पीठ पर लादकर स्कूल लाना-ले जाना करती है। यह देखकर हमें भी तकलीफ होती है। कई बार मैंने बुढ़ार में अधिकारियों से मिलकर सहायता की बात की, लेकिन जवाब आता है कि बच्चा अभी 18 वर्ष का नहीं है। उसके पहले उसे स्कूटी नहीं मिल सकती।
वहीं, जिला सामाजिक न्याय विभाग की अधिकारी प्रज्ञा मरावी ने कहा कि शिविर में यदि हितग्राही आवश्यक कागजात लेकर पहुंचते हैं, तो दस्तावेजों की जांच के बाद पात्रता के अनुसार उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाएगा।