शाजापुर में हाईवे पर होटल के सामने खड़ी बस में लगी आग, 4 वर्षीय बच्चा जिंदा जला
हादसे के वक्त यात्री होटल में चाय- नाश्ता कर रहे थे और कुछ बस में सवार थे। आग लगते ही सभी यात्री नीचे उतर गए, किन्तु बच्चा बस में फंसा रह गया। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 16 May 2026 07:38:57 AM (IST)Updated Date: Sat, 16 May 2026 07:42:03 AM (IST)
हाईवे पर इस तरह जल गई बस। (नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- मक्सी के पास स्थित एक होटल के बाहर खड़ी थी यात्री बस
- चार वर्षीय बच्चा बस में फंसा रह गया, आग पर काबू पाने के बाद ढूंढा तो बस में कंकाल मिला
- बस में आपातकालीन द्वार नहीं था और उसमें बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का सामान भरा था
नईदुनिया प्रतिनिधि, शाजापुर। आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर मक्सी के पास स्थित होटल के बाहर खड़ी एक यात्री बस में शुक्रवार व शनिवार की दरमियानी रात आग लग गई। हादसे के वक्त अधिकांश यात्री होटल में चाय- नाश्ता कर रहे थे और कुछ यात्री बस में सवार थे। बस में आग लगते ही सभी यात्री नीचे उतर गए, किन्तु चार वर्षीय बच्चा बस में फंसा रह गया। आग पर काबू पाने के बाद बच्चे को ढूंढा तो बस के अंदर उसका कंकाल मिला। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
बस में आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस देखते ही देखते जलकर खाक हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही शाजापुर, मक्सी और तराना से फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर आग लगने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। हादसे के बाद क्षेत्र में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
बस में बड़ी मात्रा में भरा था प्लास्टिक का सामान
हादसे के पीछे लापरवाही और नियम कायदों की अनदेखी भी बड़ा कारण सामने आई है। बस में आपातकालीन द्वार नहीं था। इसके अलावा बस में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का सामान भरा था। जिसने तेजी से आग पकड़ी और एक मासूम की जान चली गई। उसका शव तक नही मिल सका। सिर्फ कंकाल ही आग पर काबू पाने के बाद बस से बरामद हुआ है।
उल्लेखनीय है कि जब भी ऐसे हादसे हुए हैं, तब नियमों की अनदेखी सामने आई है। हादसा होने के बाद जिम्मेदार जागते हैं और कुछ दिन कार्रवाई की जाती है। इसके बाद फिर नियमों की अनदेखी शुरू हो जाती है और जिम्मेदार भी लापरवाह हो जाते हैं। ऐसे में बस संचालकों में कार्रवाई का डर नहीं रहता है और वे बेखौफ होकर फिर नियमों को धता बताने लग जाते हैं।