
नईदुनिया प्रतिनिधि, आगर-मालवा। अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सुर्खियों में है। इस बीच मध्य प्रदेश के नलखेड़ा (आगर मालवा जिला) स्थित मां बगलामुखी मंदिर के नाम पर फर्जी समिति बनाकर श्रद्धालुओं से रुपये और सोने-चांदी के आभूषण दान प्राप्त करने की जानकारी सामने आई है।
कलेक्टर प्रीति यादव ने जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी के नेतृत्व में जांच दल बनाया है। इसमें शामिल अधिकारियों को सात दिन में जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया है। मां बगलामुखी मंदिर का रजत सुंदरीकरण करने के लिए कुछ लोगों ने समिति बनाई और मंदिर परिसर में दान प्राप्त कर श्रद्धालुओं को रसीद दी। चूंकि मंदिर शासकीय है, ऐसे में अशासकीय लोगों द्वारा समिति बनाकर दान एकत्रित करने पर सवाल उठ रहे हैं।
कलेक्टर प्रीति यादव ने कहा कि जांच के निर्देश दिए हैं, गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पांडवों ने की थी पूजा-अर्चना आगर-मालवा जिले में लखुंदर नदी के तट पर स्थित मां बगलामुखी माता मंदिर प्रसिद्ध पांडवकालीन सिद्धपीठ है।
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध में विजय के लिए श्रीकृष्ण के निर्देश पर की थी। यहां मां बगलामुखी के साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की स्वयंभू मूर्तियां हैं। यह स्थान तंत्र साधना, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एसडीएम (डिप्टी कलेक्टर) और सचिव तहसीलदार रहते हैं। मंदिर कार्यालय की व्यवस्था आउट सोर्स कर्मचारियों द्वारा संचालित की जाती है। बावजूद मंदिर के नाम पर अशासकीय समिति बनाकर दान प्राप्त किया जा रहा था।
जांच समिति मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बीएस सोलंकी की अध्यक्ष हैं और जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी नलखेड़ा मिनी अग्रवाल सदस्य हैं। यह तीन सदस्यीय समिति सात दिन में पड़ताल कर दान-संग्रहण व्यवस्था, नगद-स्वर्ण-रजत का लेखा-जोखा एवं आरोपों के संबंध में जांच कर प्रतिवेदन सुझावों सहित प्रस्तुत करेगी।
खास बात यह है कि समिति द्वारा मंंदिर परिसर में ही दान एकत्रित कर रसीद दी जा रही थी। जबकि मंदिर शासकीय है और डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम यहां के अध्यक्ष व तहसीलदार सचिव रहते हैं। इसके अलावा मंदिर कार्यालय की व्यवस्था आउट सोर्स कर्मचारियों भरोसे रहती है। डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार समय-समय पर मंदिर आते रहते हैं। कार्यालय संचालन का काम देखने वाले आउट सोर्स कर्मचारी भी हर समय यहां रहते हैं। बावजूद मंदिर के नाम पर अशासकीय समिति बनाकर दान प्राप्त किया जा रहा था किंतु किसी ने इस पर आपत्ति नही ली।