
नईदुनिया प्रतिनिधि, आगर मालवा। चर्चित एनडीपीएस एक्ट की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। राजस्थान की चौमहला कोर्ट ने दो थाना प्रभारी समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आरोप है कि ड्रग्स बरामदगी की कार्रवाई नियमों के खिलाफ और फर्जी थी।
पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर आरोपित पक्ष ने मामले में न्यायालय में परिवाद लगाया था। जिसमें राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए दो थाना प्रभारी समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के सख्त आदेश दिए।
जिसके पालन में राजस्थान के डग थाने में आगर मालवा जिले के कोतवाली थाना टीआई शशि उपाध्याय और बड़ौद थाना टीआई रुपसिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट, पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा व शुभम पर नामजद व 90 अन्य पुलिसकर्मी व लोगों पर केस दर्ज किया है।
आरोप है कि ड्रग्स बरामदगी की पूरी कार्रवाई फर्जी और प्रक्रिया के खिलाफ थी। न्यायालय के इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली, कार्रवाई और जांच के तरीके पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2026 में आगर मालवा कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई का दावा किया था, जिसमें करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग, केमिकल और मशीनरी जब्त करने की बात कही गई थी।
इस कार्रवाई पर आगर मालवा के तत्कालीन एसपी विनोद सिंह ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाई थी और नशे के खिलाफ बड़ी उपलब्धी बताया था। अब उसी कार्रवाई को लेकर अदालत ने गंभीर टिप्पणी की है। फरियादी पक्ष के वकील असगर अली ने कहा कि अदालत के फैसले से यह साफ हो गया है कि पुलिस ने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया। थाना प्रभारी शशि उपाध्याय ने कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है।