कूनो के चीते को भाया राजस्थान, 7वीं बार हाड़ौती पहुंचा, अब बारां-कोटा के जंगलों को बना रहा अपना नया घर
मध्य प्रदेश श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक चीता बार-बार राजस्थान के हाड़ौती अंचल को ठिकाना बना रहा है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 21 Mar 2026 10:07:37 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Mar 2026 10:07:36 PM (IST)
कूनो के चीते को भाया राजस्थान, 7वीं बार हाड़ौती पहुंचा।HighLights
- कूनो के चीते को भाया राजस्थान, 7वीं बार हाड़ौती पहुंचा।
- अब बारां-कोटा के जंगलों को बना रहा अपना नया घर।
- वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सफलता का भी संकेत है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। मध्य प्रदेश श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक चीता बार-बार राजस्थान के हाड़ौती अंचल को ठिकाना बना रहा है।
आशा का शावक केपी-2 सातवीं बार राजस्थान के बारां और कोटा जिलों के जंगलों में पहुंचा। इसके पहले उसका पीछा करते हुए केपी-3 भी रामगढ़ क्षेत्र पहुंच गया था, हालांकि बाद में वह खुद ही मध्य प्रदेश की सीमा में लौट आया।
केपी-2 का मूवमेंट और नए वन क्षेत्र
बता दें कि केपी-2 का मूवमेंट राजस्थान के केलवाड़ा के पास खंडेला के घास मैदानों से शुरू हुआ, जो बाद में बाज-आमली, शाहाबाद और किशनगंज रामगढ़ वन क्षेत्र तक जा पहुंचा। हाल ही में उसे आमल्दा-गेंता के जंगलों में कालीसिंध और चंबल नदी के आसपास देखा गया। रेंजर दीपक शर्मा ने बताया कि चीते पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
हाड़ौती क्षेत्र क्यों बना चीतों की पसंद?
विशेषज्ञों का मानना है कि हाड़ौती क्षेत्र के बड़े ग्रासलैंड, पर्याप्त शिकार (प्रे-बेस) और कम मानवीय हस्तक्षेप उसे चीतों के लिए अनुकूल बना रहा है। वहीं कूनो में बढ़ती संख्या के चलते चीते नई टेरिटरी तलाश रहे हैं। 2020-21 में वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स ने हाड़ौती क्षेत्र का सर्वे कर इसे संभावित चीता हैबिटेट माना था। उस समय प्रे-बेस की कमी बताई थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
भविष्य के चीता प्रोजेक्ट के लिए संकेत
वन्यजीव प्रेमी शंभूदयाल शर्मा का कहना है कि केपी-2 का बार-बार कूनो से निकलकर हाड़ौती पहुंचना इस बात का संकेत है कि यह क्षेत्र उसके लिए अनुकूल है। उसे प्राकृतिक रूप से यहीं बसने दिया जाए। भविष्य में हाड़ौती क्षेत्र को भी चीता प्रोजेक्ट के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश और राजस्थान के साझा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सफलता का भी संकेत है।